देहरादून। देश के विकास के साथ खाद्य सुरक्षा कानून को भी धरातल पर सख्ती से लागू किए जाने की जरूरत है। खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से जुड़े नियम केवल किताबों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। खाद्य सुरक्षा मानकों की जांच करने वाली सरकारी एजेंसियों और जिम्मेदार अधिकारियों की भी जवाबदेही तय हो, ताकि कोई अपनी जिम्मेदारी से बच न सके।
यह बात चारधाम अस्पताल, नेहरू कॉलोनी, धर्मपुर के डॉ. केपी जोशी ने कही। उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा सीधे देश के नागरिकों, खासकर बच्चों और युवा पीढ़ी के स्वास्थ्य से जुड़ा विषय है। दूषित और रसायनयुक्त खाद्य पदार्थों के बढ़ते इस्तेमाल के कारण लोग मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय संबंधी बीमारियों समेत कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की चपेट में आ रहे हैं।
डॉ. जोशी के अनुसार केवल दवाइयों के सहारे स्वस्थ समाज की कल्पना नहीं की जा सकती। लोगों को गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराना भी स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि शुद्ध और रसायनमुक्त भोजन की व्यवस्था फसल बोने और उगाने से लेकर उसके प्रसंस्करण, संरक्षण, वितरण और उपभोग तक पूरी खाद्य श्रृंखला में सुनिश्चित करनी होगी।
उन्होंने कृषि उत्पादन में अनावश्यक रसायनों के इस्तेमाल पर प्रभावी निगरानी के साथ ही पोल्ट्री और डेयरी उत्पादों में प्रतिबंधित या अनावश्यक रसायनों एवं हार्मोन के इस्तेमाल पर भी सख्ती की मांग की। उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा की पूरी व्यवस्था तभी प्रभावी होगी, जब स्वच्छ पानी की उपलब्धता से लेकर भोजन तैयार होने और उपभोक्ता तक पहुंचने तक प्रत्येक स्तर पर गुणवत्ता की निगरानी हो।
डॉ. जोशी ने कहा कि खाद्य उद्योगों, होटल, रेस्टोरेंट, रसोईघरों, बारात और बड़े आयोजनों में भोजन तैयार करने वाले प्रतिष्ठानों के लिए खाद्य सुरक्षा संबंधी लाइसेंस और निर्धारित मानकों का पालन अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाना चाहिए। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ निगरानी और जांच में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि देश के विकास के साथ फूड सेफ्टी कानून को प्रभावी और सख्ती से लागू करने के लिए ठोस व्यवस्था बनाई जाए। डॉ. जोशी ने कहा कि वर्षों से चलाए जा रहे उनके अभियान ‘स्वस्थ उत्तराखंड, स्वस्थ इंडिया’ से देशभर के लोग, शासक, प्रशासक और जिम्मेदार नागरिक जुड़ रहे हैं। उनका लक्ष्य भारत को शुद्ध भोजन और स्वच्छता के क्षेत्र में एक आदर्श देश बनाना है।



