
देहरादून में 23 फरवरी को कुछ मोहल्लों में अख़बारों के साथ एक कथित सांप्रदायिक पर्चा बांटे जाने और 25 फरवरी को उसके आह्वान पर जुलूस निकाले जाने के मामले में राज्य के विपक्षी दलों और विभिन्न जन संगठनों ने पुलिस महानिदेशक को शिकायत सौंपकर कार्रवाई की मांग की है।
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि “देवभूमि रक्षा मंच” के नाम से वितरित पर्चों पर प्रिंटर का नाम अंकित नहीं था, जो नियमों के विपरीत है। पर्चे में कुछ घटनाओं का उल्लेख करते हुए सरकारी अधिकारियों और पुलिस प्रशासन पर आरोप लगाए गए हैं। साथ ही, इसमें अपराधों के लिए एक समुदाय विशेष की ओर संकेत किए जाने की बात भी कही गई है।
विपक्षी दलों का कहना है कि उत्तराखंड शांति, लोकतंत्र और सौहार्द के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन बीते कुछ वर्षों से कुछ संगठनों द्वारा कथित रूप से नफरती प्रचार और हिंसक अभियान चलाए जा रहे हैं। उनका आरोप है कि पुलिस प्रशासन इन मामलों में अपेक्षित सख्ती नहीं दिखा रहा है।
शिकायत में पुरोला, उत्तरकाशी, मसूरी और नैनीताल सहित अन्य स्थानों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि पूर्व में ऐसे कार्यक्रमों के दौरान हिंसा की घटनाएं हुईं, जिनमें पुलिसकर्मी और आम नागरिक घायल हुए तथा संपत्तियों को नुकसान पहुंचा।
शिकायतकर्ताओं ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 197(1)(b) का हवाला देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति किसी धार्मिक या जातिगत वर्ग को उसके संवैधानिक अधिकारों से वंचित करने का प्रचार करता है तो यह गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
उन्होंने मांग की है कि संबंधित पर्चे और जुलूस के आयोजकों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, उच्चतम न्यायालय के 2018 के निर्णयों के अनुरूप नफरती अपराधों पर रोक लगाने के लिए विशेष व्यवस्था लागू करने और ऐसे मामलों में स्वतः संज्ञान लेकर त्वरित कार्रवाई करने की भी मांग की गई है।
शिकायत ईमेल के माध्यम से पुलिस महानिदेशक, उत्तराखंड को भेजी गई है। हस्ताक्षरकर्ताओं में संजय शर्मा (कांग्रेस), डॉ. सत्यनारायण सचान (समाजवादी पार्टी), समर भंडारी (भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी), इंद्रेश मैखुरी (भाकपा माले), एडवोकेट हरबीर सिंह कुशवाहा (सर्वोदय मंडल उत्तराखंड) तथा विनोद बडोनी और शंकर गोपाल (चेतना आंदोलन) शामिल हैं।





