
उत्तरकाशी : राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के पावन अवसर पर पी.एम. श्री कम ला राम नौटियाल राजकीय आदर्श इंटर कॉलेज धौन्तरी ने अपनी वार्षिक विज्ञान पत्रिका ‘विज्ञान मण्डल’ (साइंस सर्कल) का विमोचन कर वैज्ञानिक चेतना का नया अध्याय लिखा है। यह पत्रिका विशेष रूप से प्रसिद्ध विज्ञान लेखक देवेन्द्र मेवाड़ी जी के उस विजन को समर्पित है, जिसमें वे विज्ञान को प्रयोगशालाओं से निकालकर आम आदमी की सरल भाषा और ‘किस्सा-गोई’ तक पहुँचाने की वकालत करते हैं। मेवाड़ी जी का मानना है कि “विज्ञान को जब तक हम अपनी लोकभाषा और कहानियों में नहीं पिरोएंगे, तब तक वह समाज की रगों में नहीं दौड़ेगा।” उनके इसी मूल मंत्र को आधार बनाकर इस पत्रिका के माध्यम से छात्रों ने वैज्ञानिक तथ्यों को अत्यंत रोचक ढंग से प्रस्तुत किया है।
पत्रिका के इस अंक में मेवाड़ी जी के लेखन की स्पष्ट छाप दिखाई देती है। जिस प्रकार वे जटिल वैज्ञानिक विषयों को सहजता से समझाते हैं, उसी तर्ज पर विद्यालय के नन्हे लेखकों ने ‘रमन प्रभाव’, ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ और ‘अंतरिक्ष विज्ञान’ जैसे गूढ़ विषयों को अपनी मौलिक दृष्टि से उकेरा है। यह अंक न केवल सूचनाओं का संग्रह है, बल्कि देवेन्द्र मेवाड़ी जी द्वारा प्रतिपादित ‘लोक विज्ञान’ की अवधारणा को धरातल पर उतारने का एक ईमानदार प्रयास है।
विमोचन के दौरान वक्ताओं ने रेखांकित किया कि मेवाड़ी जी हमेशा से ही दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों के बच्चों में वैज्ञानिक जिज्ञासा जगाने के प्रबल पक्षधर रहे हैं। ‘विज्ञान मण्डल’ के माध्यम से धौन्तरी के छात्रों ने यह सिद्ध किया है कि हिमालय की गोद में बैठकर भी आधुनिकतम तकनीक जैसे STEM शिक्षा और रोबोटिक्स पर शोधपरक दृष्टि रखी जा सकती है। पत्रिका में जहाँ एक ओर सर सी.वी. रमन के आविष्कारों की चर्चा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय पारिस्थितिकी और जैव-विविधता के संरक्षण पर भी मेवाड़ी जी की प्रकृति-प्रेम वाली प्रेरणा से ओत-प्रोत लेख संकलित किए गए हैं।
प्रधानाचार्य श्री शांति प्रसाद नौटियाल और संपादक डॉ. शम्भू प्रसाद नौटियाल ने साझा किया कि इस पत्रिका का उद्देश्य मेवाड़ी जी की ही तरह समाज में व्याप्त अंधविश्वासों को वैज्ञानिक तर्क से काटना और नई पीढ़ी में ‘क्यों’ और ‘कैसे’ पूछने की हिम्मत पैदा करना है। संपादक मंडल के छात्र-छात्राओं के लेखों में मेवाड़ी जी की स्पष्टवादिता और वैज्ञानिक शुचिता का संगम दिखाई देता है। विद्यालय के इस प्रयास को क्षेत्र में वैज्ञानिक साहित्य के संवर्धन के लिए एक सार्थक पहल माना जा रहा है।





