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हमारे इन कार्यों से देवी देवता नाराज होते हैं यह धरती माता रुष्ट होती है

Ramesh Kuriyal
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देवी सिंह पवार राज्य आंदोलनकारी: साथियों अगर कोई यह कह दे कि मैं गरीब हूं तो वह उस व्यक्ति की नाकामयाबी है क्योंकि गरीब इंसान बुद्धि का होता है धन का नहीं आज हम सब लोग उत्तराखंड की धरती पर वह कार्य कर रहे हैं जो इस धरती के अनुकूल नहीं है यह उत्तराखंड की धरती आपसे प्यार मांगती है भक्ति मांगती है प्रेम मांगती है किंतु हम उसके विपरीत चलते हैं हम सब ने उत्तर प्रदेश से अलग उत्तराखंड की डिमांड कि थी यदि हमारा उत्तराखंड बनेगा तो हम यहां का विकास यहां की तरक्की इस धरती के अनुकूल करेंगे उत्तराखंड की जो माटी है जो मिट्टी है वह पूरी विश्व से एक अलग है भिन्न है यहां फल पट्टी यहां फूलों का बगीचा यहां पशुपालन बकरी पालन भेड़ पालन खरगोश पालन मुर्गी पालन ऐसे अनेक जीव जंतु को यहां पर पालन पोषण किया जा सकता था।

परंतु हम लोग उसके विपरीत चल रहे हैं जब हमारे यहां घर पर कोई शुभ कार्य होते हैं तो हम मेहमानों को निमंत्रण देकर उनको अपने निवास स्थान पर अपने घर पर बुलाते हैं कि हमें आशीर्वाद दे किंतु वह लोग हमको आशीर्वाद न दे करके शराब देते हैं क्योंकि हम उनको शराब पिलाते हैं और उसके बदले हमको शराब मिलता है इससे हमारे पितरों को कष्ट होता है हमारे देवी देवता नाराज होते हैं यह धरती माता रुष्ट होती है तो आप ही बताओ हमारा परिवार कैसा फल फूलेगा कैसा खुश रैहेगा कैसे हम सुखी रह सकते हैं क्या हम गरीब हैं अगर हम गरीब है तो यह पैसा जो बर्बाद हो रहा है कहां से आ रहा है इसलिए मेरी आपसे प्रार्थना है निवेदन है क्योंकि मैं इस मामले में अपने को पाक साफ समझता हूं क्योंकि जितने भी कार्यक्रम मेरे घर पर हुए हैं मैंने लोगों को जूश पिलाया दाल भात खिलाई और सादा भोजन कराया

क्योंकि हमारे पास बहुत बड़ा नशा है मैं इंसान हूं ताकतवर हूं धनवान हूं विद्वान हूं नेता हूं अभिनेता हूं क्या यह कोई छोटा नशा है क्या पहले हम इस नशा से मुक्त हो जाए बड़ों को सम्मान छोटों को प्यार और प्रेम और भक्ति यह यहां की धरती या की मिट्टी चाहती है इसलिए हमने उत्तराखंड अलग प्रदेश की डिमांड रखी थी कि हम अपना प्रदेश को यहां के रीति रिवाज रेशम से चलाएं मगर इसका उल्टा हो रहा है इसलिए उत्तराखंड दिन पर दिन खाली हो रहा है गांव खाली हो गए जब हमारे पास जन था तो धन नहीं था आज धन है तो जान नहीं है जब हमारे पास जनता थी परिवार बड़ा था मकान नहीं थे आज मकान है परिवार नहीं है जब हमारे पास जल था तब नल नहीं थें आज नल है तो जल नहीं जब हमारे पशु थे तो जंगल नहीं था आज जंगल है तो पशु नहीं है इस पर विचार करो हमारे नेता गणों जो हमारा नेतृत्व कर रहे हैं हमारे विधायक चुनाव लड़ते हैं जनप्रतिनिधि चुनाव लड़ते हैं शराब देते हैं जनता को सराप देते हैं जाओ बर्बाद हो जाओ नशे में खत्म हो जाओ यह है यहां की प्रवृत्ति होश में आओ होश में आओ और जनता को अच्छे संस्कार दो ओर अपने आप भी अच्छे रास्ते के और चलना सिखों इस उत्तराखंड के प्रति सजग रहो और उत्तराखंड को नशा मुक्त करो तभी हम सुखी रह सकते हैं

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