शिव नगरी उत्तरकाशी का सार्वजनिक पार्क: सुविधा से अव्यवस्था तक, अब समाधान की घड़ी

शिव नगरी उत्तरकाशी में जड़ भरत मार्ग से गंगा मंदिर तक निर्मित सार्वजनिक पार्क का उद्देश्य अत्यंत सराहनीय था—स्थानीय बुजुर्गों को शांत वातावरण, बच्चों को खेलने का सुरक्षित स्थान और नागरिकों को सुकून के कुछ पल देना। सुंदर बेंचों और खुले परिसर के साथ यह पार्क नगर की सामाजिक धड़कन बन सकता था, परंतु वर्तमान स्थिति चिंता का विषय बन चुकी है। दिन के समय यह स्थान युवाओं के बैठने का अड्डा और सूर्यास्त के बाद नशे की गतिविधियों का केंद्र बनता जा रहा है।
सेना से सेवानिवृत्त मान सिंह रावत जी सहित अनेक स्थानीय नागरिकों ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया, तो यह सार्वजनिक स्थल समाज के लिए असुरक्षा और अव्यवस्था का प्रतीक बन जाएगा। अजय प्रकाश बडोला ने नगर पालिका क्षेत्र के पार्कों में सीसीटीवी कैमरे लगाने और नियमित पुलिस गश्त बढ़ाने की मांग की है, जो वर्तमान परिप्रेक्ष्य में अत्यंत आवश्यक प्रतीत होती है।
स्थानीय निवासियों—बिरेंद्र पुरी, अनिल पुरी, राजेश बिज, तनुजा राणा, अजय बहुगुणा, प्रितम गुंबर, अजय बडोला, विष्णु पाल सिंह रावत, मुनेंद्र रावत सहित अन्य नागरिकों—ने एक व्यावहारिक सुझाव भी रखा है। उनका मत है कि यदि इस पार्क से सीधे प्रसिद्ध पौराणिक मणिकर्णिका घाट की ओर सीढ़ी या वैकल्पिक मार्ग बना दिया जाए, तो लोगों की आवाजाही स्वाभाविक रूप से बढ़ेगी। जब किसी स्थान पर निरंतर जनसंचार होता है, तो वहां असामाजिक तत्वों की गतिविधियां स्वतः कम हो जाती हैं।
यह समस्या केवल एक पार्क तक सीमित नहीं है; यह बढ़ती नशे की प्रवृत्ति और सार्वजनिक स्थलों के दुरुपयोग का संकेत भी है। “नशामुक्त शिव नगरी, ड्रग मुक्त काशी” का संकल्प तभी सार्थक होगा जब प्रशासनिक कठोरता के साथ सामाजिक जागरूकता भी जुड़े। हर वार्ड में नशा मुक्ति समिति का गठन, नागरिकों की सक्रिय भागीदारी और पुलिस प्रशासन के साथ समन्वय इस दिशा में प्रभावी कदम हो सकते हैं।
अब समय है कि शासन-प्रशासन इस मुद्दे को केवल शिकायत के रूप में न देखे, बल्कि इसे सामाजिक सुधार के अवसर के रूप में स्वीकार करे। एक सार्वजनिक पार्क केवल हरियाली का टुकड़ा नहीं होता, वह समाज की सभ्यता, सुरक्षा और संस्कारों का दर्पण होता है। उत्तरकाशी जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक नगर में यह दर्पण धूमिल न हो—इसके लिए सामूहिक प्रयास, सजग प्रशासन और जागरू येक नागरिकता तीनों की समान भागीदारी आवश्यक है।



