
देहरादून। उत्तराखंड की आर्थिक स्थिति को लेकर मंगलवार को विधानसभा में पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में कई अहम आंकड़े सामने आए हैं। सर्वेक्षण के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य की विकास दर 7.23 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह रिपोर्ट संसदीय कार्यमंत्री सुबोध उनियाल ने सदन के पटल पर रखी।
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024-25 के अंतिम अनुमान में विकास दर 6.44 प्रतिशत आंकी गई थी, जबकि 2025-26 में इसके बढ़कर 7.23 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। वहीं राज्य की प्रतिव्यक्ति आय में भी वृद्धि दर्ज की गई है और इसके 9.25 प्रतिशत बढ़कर 2.73 लाख रुपये से अधिक होने की संभावना जताई गई है।
राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में प्राथमिक क्षेत्र, जिसमें कृषि, बागवानी और पशुपालन शामिल हैं, का 0.74 प्रतिशत योगदान बताया गया है।
आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार राज्य गठन के बाद से राजस्व संग्रहण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2025-26 में दिसंबर तक 9179.80 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह किया गया। वहीं पेट्रोल, डीजल, एटीएफ, नेचुरल गैस और शराब से 1878.65 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य में विनिर्माण क्षेत्र में तीन गुना वृद्धि दर्ज की गई है। सड़क कनेक्टिविटी भी लगातार बेहतर हुई है। वर्ष 2000 में प्रदेश में कुल 15,470 किलोमीटर सड़कें थीं, जो बढ़कर अब 43,765 किलोमीटर हो गई हैं।
25 वर्षों में छह गुना बढ़े उद्योग
उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) क्षेत्र तेजी से उभरा है। प्रदेश में एमएसएमई इकाइयों की संख्या बढ़कर 94,595 हो गई है। राज्य गठन के बाद से उद्योगों की संख्या में छह गुना और पूंजी निवेश में 25 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। एमएसएमई क्षेत्र में 17,743 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है और इससे करीब 4.63 लाख लोगों को रोजगार मिला है। प्रदेश में मान्यता प्राप्त स्टार्टअप की संख्या भी बढ़कर 210 हो गई है।
स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार
प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से संस्थागत प्रसव में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। राज्य गठन के बाद से संस्थागत प्रसव में 296.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और वर्तमान में 83.2 प्रतिशत प्रसव अस्पतालों में हो रहे हैं। सरकार ने वर्ष 2030 तक प्रति एक हजार आबादी पर एक डॉक्टर तैनात करने का लक्ष्य तय किया है। साथ ही राजकीय मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशियलिटी सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं।
83 हजार किसानों को फसल बीमा
प्रदेश में 83,097 किसानों को फसल बीमा योजना से जोड़ा गया है। दिसंबर 2025 तक 18,365.18 हेक्टेयर क्षेत्र में फसलों का बीमा कराया गया है, जिसकी कुल बीमित राशि 136.73 करोड़ रुपये है।
मिलेट योजना के तहत राज्य में 1.10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मोटे अनाजों की खेती की जा रही है, जिसकी औसत उत्पादकता 1.5 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर है। वहीं प्रदेश में 5.77 लाख किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड भी जारी किए गए हैं।





