देहरादून। उत्तराखंड के नए नगर निकाय अब धीरे-धीरे डीजल के झंझट से मुक्त होने जा रहे हैं। शहरी विकास निदेशालय ने इन निकायों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए ई-वाहनों की खरीद का निर्णय लिया है। इसके तहत कूड़ा उठान और अपशिष्ट प्रबंधन का अधिकांश कार्य इलेक्ट्रिक वाहनों के माध्यम से किया जाएगा।
राज्य के नगर निकायों में हर साल डीजल पर बड़ी राशि खर्च होती है, क्योंकि कूड़ा उठाने और अपशिष्ट प्रबंधन का काम अभी तक डीजल वाहनों से ही किया जाता है। इस खर्च को कम करने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शहरी विकास विभाग ने नए नगर निकायों में ई-वाहनों से काम शुरू करने की योजना बनाई है।
योजना के तहत शहरी विकास निदेशालय 80 ई-ट्रक और 49 ई-कार्ट की खरीद करेगा। इसके अलावा इन वाहनों के संचालन के लिए 25 ईवी चार्जिंग स्टेशन भी स्थापित किए जाएंगे, ताकि नगर निकायों में सफाई व्यवस्था सुचारु रूप से चल सके।
शहरी विकास सचिव नितेश झा के अनुसार ई-वाहनों के उपयोग से जहां नगर निकायों के ईंधन पर होने वाले खर्च में कमी आएगी, वहीं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम होगा।
यह खरीद उधमसिंह नगर के चार, हरिद्वार के पांच, देहरादून के एक, टिहरी के एक, अल्मोड़ा, बागेश्वर और पौड़ी के एक-एक नए नगर निकायों के लिए की जाएगी।
अधिकारियों के अनुसार जिन नगर निकायों का क्षेत्र पहाड़ी और अत्यधिक ऊंच-नीच वाला है, वहां फिलहाल डीजल वाहन ही उपलब्ध कराए जाएंगे, जबकि मैदानी क्षेत्रों के नगर निकायों में ई-वाहनों का संचालन किया जाएगा।


