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कनाडा के यूनिवर्सिटी ऑफ क्यूबेक एट मॉन्ट्रियल और दून विश्वविद्यालय के बीच समझौता l

समझौते से दोनों विश्वविद्यालयों के संयुक्त शोध प्रेरित एवं प्रोत्साहित होंगे: प्रो सुरेखा डंगवाल कुमाऊँ एवं गढ़वाल के विभिन्न क्षेत्रों का अध्ययन पहले चरण में संचालित होगा: प्रो. मैथ्यू बोइसवर्ट

दून विश्वविद्यालय, देहरादून ने अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 17 मार्च, 2026 की देर शाम को कनाडा के यूनिवर्सिटी ऑफ क्यूबेक एट मॉन्ट्रियल (UQAM) के साथ शोध व शैक्षिक कार्यों के संचालन पर एक समझौता (MoU) किया। समझौते पर दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने हस्ताक्षर करते हुए कहा कि इस समझौते का उद्देश्य दोनों विश्वविद्यालयों के बीच संयुक्त शोध और छात्र आदान-प्रदान (exchange) को बढ़ावा देना है। इससे छात्रों और शिक्षकों को एक-दूसरे से सीखने और अंतरराष्ट्रीय अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।                  कनाडा के प्रो. मैथ्यू बोइसवर्ट ने कहा कि इस सहयोग के तहत सबसे पहले कुमाऊँ (उत्तराखंड) क्षेत्र में कृषि से जुड़े पारंपरिक अनुष्ठानों पर एक संयुक्त शोध परियोजना शुरू की जाएगी। इस परियोजना को UQAM के प्रो. मैथ्यू बोइसवर्ट और दून विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग के डॉ. अविजीत सहाय द्वारा संयुक्त रूप से संचालित किया जाएगा। इस कड़ी में UQAM की पीएचडी छात्रा सोलीन फेरेरा दून विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग में विजिटिंग स्कॉलर के रूप में जून में आएंगी। इससे दोनों संस्थानों के बीच शोध और शैक्षणिक सहयोग और मजबूत होगा।               दून विश्वविद्यालय के डॉ नित्यानंद हिमालय शोध व अध्ययन केंद्र के डॉ अविजीत सहाय ने कहा कि इस समझौते के तहत आगे चलकर समर स्कूल, सेमिनार, कॉन्फ्रेंस और संयुक्त शोध प्रकाशन भी किए जाएंगे। इन गतिविधियों से दोनों विश्वविद्यालयों के बीच लंबे समय तक सहयोग बना रहेगा।हस्ताक्षर समारोह में दोनों संस्थानों के कई शिक्षक उपस्थित थे। दून विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार श्री दुर्गेश डिमरी, डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर (DSW) प्रो. एच. सी. पुरोहित, डॉ. राजेश भट्ट, डॉ. हिमानी शर्मा, डॉ. चारु द्विवेदी, डॉ. सरिता सिंह और डॉ. अविजीत सहाय, अभिनव जोशी शामिल हुए। वहीं UQAM की ओर से अंतरराष्ट्रीय संबंध विभाग के निदेशक श्री नेको लिकोन्गो, प्रो. मैथ्यू बोइसवर्ट और सुश्री सोलीन फेरेरा उपस्थित थे। शुरुआत में यह समझौता 5 वर्षों के लिए मान्य रहेगा और दोनों संस्थानों की सहमति से इसे आगे बढ़ाया जा सकता है।समझौते से प्रसन्न प्रो एच सी पुरोहित ने कहा कि यह समझौता दून विश्वविद्यालय के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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