न्यायपालिका सिर्फ न्याय प्रदान करने का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की प्रेरक शक्ति भी
मुरादाबाद स्थित टीएमयू में भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस यूयू ललित का सार्थक संवाद

ये हैं समारोह की मुख्य बातें
युवाओं से आह्वान – वे संवैधानिक मूल्यों का सम्मान करें
न्यायपालिका की समानता, न्याय और विकास में अहम भूमिका
तीन तलाक कानून से मुस्लिम महिलाएं हुईं और अधिक सशक्त
मुरादाबाद। देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री उदय उमेश ललित ने कहा कि न्यायपालिका केवल न्याय प्रदान करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह संवैधानिक मूल्यों की संरक्षक और सामाजिक परिवर्तन की प्रेरक शक्ति भी है। भारतीय न्यायपालिका ने देश में लोकतंत्र को सुदृढ़ करने और समावेशी विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे संवैधानिक मूल्यों का सम्मान करते हुए राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान दें।
न्यायमूर्ति श्री ललित मुरादाबाद स्थित तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी की ओर से फ्रॉम कोर्ट रूम टू नेशन बिल्डिंग ः लीडरशिप लेसन फ्रॉम द ज्यूडिशरी पर लीडरशिप टाक सीरीज़ के सेशन- 18 में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। इससे पहले मुख्य अतिथि के साथ टीएमयू के कुलपति प्रो. वीके जैन, डीन एकेडमिक्स प्रो. मंजुला जैन, कॉलेज ऑफ लॉ एंड लीगल स्टडीज के डीन प्रो. हरबंश दीक्षित आदि ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
मुख्य अतिथि सीधे प्रशासनिक भवन पहुंचे, जहां यूनिवर्सिटी के आला अफसरों ने स्वागत किया। अंत में वीसी ने मुख्य अतिथि को पोट्रेट देकर सम्मानित किया। टाक सीरीज के बाद टीएमयू के कुलाधिपति सुरेश जैन और एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर अक्षत जैन ने प्रशासनिक भवन में मुख्य अतिथि का स्वागत किया। ईडी अक्षत जैन ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश को यूनिवर्सिटी की बड़ी उपलब्धियां बताईं।
मुख्य अतिथि ने संविधान के अनुच्छेद 31ए, 31बी एवं 31सी का उल्लेख करते हुए बताया कि इन प्रावधानों ने भूमि सुधार और जनकल्याणकारी नीतियों को लागू करने में सहायता की। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की ओर से शुरू किए गए आर्थिक सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन नीतियों ने संपत्ति के सृजन के साथ-साथ उसके संतुलित वितरण का मार्ग प्रशस्त किया।
उन्होंने कहा कि तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित करने से मुस्लिम महिलाओं को न्याय, सम्मान और समान अधिकार प्राप्त हुए, जिससे उनकी राष्ट्र निर्माण में भागीदारी और अधिक सशक्त हुई। बता दें कि तीन तलाक को असंवैधानिक पारित करने वाली पांच सदस्यीय बेंच में न्यायमूर्ति यूयू ललित भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि प्राथमिक स्तर तक निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाया जाना लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय है, जिससे प्रत्येक बच्चे को शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित हुआ है।
शिक्षा क्षेत्र में निजी संस्थानों की भागीदारी से शिक्षा के अवसरों का विस्तार हुआ है, जिससे विद्यार्थियों को बेहतर संसाधन एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो रही है। टाक सीरीज-18 में प्रो. एमपी सिंह, प्रो. नवनीत कुमार, प्रो. सुशील सिंह, डॉ. अमित कंसल के संग-संग लॉ, एलाइड हेल्थसाइंसेज़ कॉलेज आदि के स्टुडेंट्स भी मौजूद रहे। टाक सीरीज में स्टुडेंट्स ने न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित से सवाल भी पूछे। संचालन डॉ. नेहा आनन्द ने किया।



