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केदारनाथ के खच्चर चालक अतुल ने रचा इतिहास, IIT JAM में AIR 649 पाकर IIT मद्रास पहुंचे

Ramesh Kuriyal
3 Min Read

रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के छोटे से गांव बीरों-देवल के 22 वर्षीय अतुल कुमार ने संघर्ष और मेहनत की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। केदारनाथ धाम में तीर्थयात्रियों के लिए घोड़े-खच्चर चलाने वाले अतुल ने IIT JAM 2025 में ऑल इंडिया रैंक 649 हासिल कर Indian Institute of Technology Madras में एमएससी (मैथमेटिक्स) में प्रवेश पाया है।

संघर्षों के बीच चमकी प्रतिभा

अतुल के पिता ओमप्रकाश और मां संगीता देवी केदारनाथ यात्रा पर निर्भर हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण अतुल ने वर्ष 2018 से पिता के साथ खच्चर चलाने का काम शुरू कर दिया। यात्रा सीजन के दौरान वह रोजाना 8-10 घंटे कठिन पहाड़ी रास्तों पर तीर्थयात्रियों का सामान ढोते रहे, लेकिन पढ़ाई के प्रति उनका जुनून कभी कम नहीं हुआ।

बिना कोचिंग हासिल की बड़ी सफलता

दिनभर की मेहनत के बाद अतुल रोजाना 4-5 घंटे स्वअध्ययन करते थे। उन्होंने न तो किसी कोचिंग का सहारा लिया और न ही विशेष संसाधनों का। किताबों, दोस्तों के नोट्स और समूह चर्चा के जरिए उन्होंने अपनी तैयारी पूरी की।

स्कूल से ही रहा शानदार प्रदर्शन

अतुल की प्रतिभा स्कूल के दिनों से ही झलकने लगी थी। उन्होंने उत्तराखंड बोर्ड की 10वीं परीक्षा में 94.8% अंक हासिल कर राज्य में 17वां स्थान प्राप्त किया, जबकि 12वीं में 92.8% अंक के साथ 21वीं रैंक हासिल की। इसके बाद उन्होंने Hemvati Nandan Bahuguna Garhwal University से बीएससी (मैथमेटिक्स) किया, जहां हर सेमेस्टर में 80% से अधिक अंक प्राप्त किए।

अतुल बोले—‘बाबा केदारनाथ का आशीर्वाद’

अपनी सफलता पर अतुल कहते हैं,
“यह सब बाबा केदारनाथ का आशीर्वाद है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि खच्चर चलाते-चलाते IIT तक पहुंच पाऊंगा।”

वह अपनी इस उपलब्धि का श्रेय माता-पिता, गुरुजनों और दोस्तों को देते हैं, जिन्होंने हर परिस्थिति में उनका साथ दिया।

युवाओं के लिए प्रेरणा बनी कहानी

अतुल कुमार की यह सफलता उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया कि कठिन परिस्थितियां भी मजबूत इरादों के आगे छोटी पड़ जाती हैं।

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