चमोली। जनपद चमोली के नंदानगर क्षेत्र में 15 अगस्त की शाम से लापता युवती सुमित्रा का शव सोमवार को नंदाकिनी (अलकनंदा) नदी किनारे बरामद हो गया। युवती के नदी में बहने की आशंका उसी दिन से जताई जा रही थी। करीब एक किलोमीटर दूर नदी में उसकी चप्पल मिलने के बाद परिजन और ग्रामीण उसकी तलाश में जुटे थे।
बताया गया कि मामला नंदानगर क्षेत्र के ग्राम सभा सुतोल के तातड़ा तोक से जुड़ा है। स्थानीय लोगों के अनुसार क्षेत्र में एक पुरानी धार्मिक मान्यता के चलते महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान गांव की सीमा में स्नान करने की अनुमति नहीं होती। ऐसी स्थिति में महिलाओं को तातड़ा से करीब पांच किलोमीटर दूर सुतोल गांव के पास नंदाकिनी नदी के किनारे जाकर स्नान करना पड़ता है।
जानकारी के अनुसार सुमित्रा 15 अगस्त को सांस्कृतिक कार्यक्रम देखने के बाद शाम के समय स्नान के लिए नदी किनारे गई थी। इसके बाद वह वापस नहीं लौटी। नदी में करीब एक किलोमीटर दूर उसकी चप्पल मिलने के बाद उसके बहने की आशंका जताई गई थी। आज उसका शव मिलने की पुष्टि हुई।
हादसे ने पुरानी प्रथा पर खड़े किए सवाल
घटना के बाद क्षेत्र में महिलाओं की सुरक्षा और मासिक धर्म से जुड़ी सामाजिक-धार्मिक मान्यताओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता रश्मि सती नैनवाल ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से इस प्रथा पर चिंता जताई है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान गांव से करीब पांच किलोमीटर दूर नदी किनारे स्नान के लिए जाना पड़ता है, तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा। जंगल और सुनसान क्षेत्र होने के कारण ऐसे स्थानों पर जंगली जानवरों के अलावा असामाजिक और आपराधिक तत्वों का भी खतरा बना रहता है।
उन्होंने कहा कि मासिक धर्म एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। इसके नाम पर महिलाओं को गांव से दूर और असुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए मजबूर करना उनके लिए किसी प्रताड़ना से कम नहीं है।
जागरूकता के साथ प्रथा पर पुनर्विचार की अपील
रश्मि सती नैनवाल ने क्षेत्र के बुजुर्गों और जागरूक युवाओं से इस परंपरा पर पुनर्विचार करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्थाएं अपनी जगह हैं, लेकिन ऐसी कोई भी परंपरा महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान से ऊपर नहीं हो सकती।
उन्होंने क्षेत्रवासियों से अपील की कि महिलाओं को ऐसी परिस्थितियों में न भेजा जाए, जिससे उनकी जान जोखिम में पड़े। उनका कहना है कि आस्था और परंपरा का पालन मानव जीवन की सुरक्षा के साथ होना चाहिए।
(सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर)



