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कला दीर्घा अंतरदेशीय दृश्य कला पत्रिका एवं कला स्रोत कला वीथिका, अलीगंज, लखनऊ

Ramesh Kuriyal
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कलादीर्घा दृश्य कला पत्रिका एवं कला स्रोत कला वीथिका, लखनऊ द्वारा आयोजित वत्सल अखिल भारतीय चित्रकला प्रदर्शनी के चौथे दिन आज आचार्य जयकृष्ण अग्रवाल, पूर्व प्राचार्य, कला एवं शिल्प महाविद्यालय, लखनऊ अतिथि थे, जिनका स्वागत डॉ लीना मिश्र ने बाल वृक्ष प्रदान कर किया और आचार्य अग्रवाल ने कलाकारों से संवाद करते हुए कला के अनेक पक्षों पर अपनी राय रखी। प्रोफेसर अग्रवाल ने सहभागी कलाकारों एवं नगर के कला प्रेमियों से भारतीय कला की समकालीन प्रवृत्तियों एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रहे कला प्रयोगों पर विधिवत बात की एवं अपनी कलाशिक्षा, अपने कला अध्यापन और कला अभ्यास पर चर्चा की और बताया कि तब और अब के कला मूल्य, शिक्षण पद्धति और संवेदनाओं में क्या परिवर्तन आया है।

उन्होंने यह भी बताया कि कला शिक्षा को सामान्य शिक्षा जैसा न समझते हुए सरकार और कला संस्थानों को इस पर गंभीरता से विचार करते हुए वह स्वतंत्रता और सुविधा देनी चाहिए जो कला शिक्षा में आवश्यक होती है। इस अवसर पर प्रदर्शनी की क्यूरेटर डॉ लीना मिश्र, समन्वयक डॉ अनीता वर्मा एवं सुमित कुमार, वरिष्ठ कलाकार किरन राठौर, अजीत सिंह, सहभागी कलाकारों में डॉ अवधेश मिश्र, प्रशांत चौधरी, निधि चौबे, अनुराग गौतम, अवनीश भारती, एस के सौरभ, संध्या यादव, रणधीर, सौरवी सिंह, सुमित कश्यप, सपना यादव, दिशा मौर्य, कुलदीप,करुणा तिवारी,अर्पिता द्विवेदी आदि कलाकार उपस्थित थे।

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