पत्रकारिता उद्योग से ज्यादा जन सेवा

Ramesh Kuriyal
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चकराता। पत्रकारिता एक उद्योग से कहीं ज्यादा जन सेवा है। एक पत्रकार के लिए उसकी आत्मा ही सच्चे अर्थों में उसकी पथ प्रदर्शिका होती है।पत्रकार समाचार के माध्यम से पाठकों की जिज्ञासा की संतुष्टि कर उन्हें सच्चे नागरिक होने का बोध भी करवाता है।
श्री गुलाब सिंह राजकीय महाविद्यालय चकराता में कौशल विकास पाठ्यक्रम के अंतर्गत चल रहे विषय ‘पत्रकारिता’ की कक्षा में प्राचार्य प्रो.केएल तलवाड़ ने विद्यार्थियों को पत्रकारिता के उद्देश्य से परिचित कराते हुए यह बातें कही। उन्होंने कहा कि पाठकों को सूचित करना यानी उन तक सही बात पहुंचाना हर पत्रकार का दायित्व है। पाठक को यह विश्वास होना चाहिए कि छपा हुआ हर शब्द ईमानदारी से लिखा गया है और उसके पीछे कोई दुराग्रह नहीं है। पत्रकार को आरोपित व्यक्ति का पक्ष प्राप्त करने की कोशिश भी अवश्य करनी चाहिए।
साम्प्रदायिक सद्भाव कायम करने,राष्ट्रीय जीवन धारा में विभिन्न वर्गों के सहयोग से स्वस्थ विकास में प्रेस की महत्वपूर्ण तथा सार्थक भूमिका होती है। सनसनीखेज, उत्तेजनात्मक एवं चरित्र हनन करने वाली पत्रकारिता को पीत-पत्रकारिता कहा जाता है,जिससे एक जिम्मेदार पत्रकार को बचना चाहिए।
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