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हजारों की संख्या में पहुंची निरंकारी संगत

Ramesh Kuriyal
3 Min Read

देहरादून वाईपास निरंकारी सत्संग भवन में हजारों की संख्या में संगतों आना शुरू हुआ।हर एक अनुयायी खुश नजर आ रहा था।सेवादल की वर्दी में महिला पुरुषों के सेवायें देखते ही ऐसा लग रहा था मानो इनके सामने सरकारी तंत्र बौना साबित हो रहा था।हजारों की भीड़ केवल सेवादल के लोग बड़े शालीनतापूर्वक हाथ जोड़कर हर एक अनुयायी को आगे से आगे बढ़ा रहे थे। आपस में प्यार प्रेम की मिसाल इस मिशन में देखने को मिली। देहरादून ब्रांच में एक दर्जन से अधिक सेक्टर में हमेशा सुबह सगतें होती है ।

जो आज एक साथ एकत्रित होकर मानव को इस संसार में जन्म लेने के मायने समझा रहे थे। आज इंसान ही इंसान का दुश्मन बना हुआ है।इंसान जंगली जानवरों से इतना नहीं डरता जितना इंसान से डर रहा है। इस सत्संग में केवल महिलाये ही भाग ले रही थी। संगत को संबोधित करते हुए साविन्द्र कौर ने कहा कि हर युग मे सद्गुरु साकार रूप में आता है पूरे मानव का कल्याण करता है । जिसने पहिचान लिया उसका जीवन आनन्द से बीत जाता है जो किन्तु परन्तु में उलझा रहता है वह उसी में उलझ कर रह जाता है ।उन्होंने कहा कि स्त्री के रूप अनेक है जहां माँ, बहिन ,पत्नी का रोल निभाती है वही कई तरह के अत्याचार भी सहती है ।परिवार की बहुत बड़ी जिम्मेदारी निभाती है ।आज धरती पर स्त्री के रूप में सद्गुरु सुदीक्षा महाराज जी अवतरित हो चुकी है, जो पूरे विश्व में मानव को मानवता का सन्देश दे रही है ।समाज में जहां महिलाओं को केवल चार दीवारों में कैद कर रखा है वही निरंकारी मिशन में महिलाओं को आगे से आगे की पंक्ति में खड़ा कर रखा है। निरंकारी मिशन की ज्ञान प्रचारक इंद्रा नकोटी ने गढ़वाली भाषा का सहारा लेते हुए कहा कि आज निरंकारी मिशन के अनुयायी जगह जगह खुले मंच से कह रहे हैं कि भगवान को देखा जा सकता है।हमने देखा है तभी हर एक से प्रेम भी करते हैं। वही सुशील रावत ,रेखा भट्ट ने भगवान कि महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि इस युग में साकार रूप में सद्गुरु अवतरित हैं जो हर एक को मानवता का पाठ पढ़ा रही हैं। गढ़वाली, कुमाउनी,नेपाली भाषा में भजनों से भी संगते खूब निहाल हुई।संगत का संचालन शीतल एवं शशी बिष्ट ने बखूबी निभाया।

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