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फूलदेई महोत्सव: परंपरा-संस्कृति के संरक्षण का संदेश, गुरुकुलम के बच्चों ने निभाई विरासत

उत्तरकाशी। चैत्र मास की संक्रांति से शुरू होकर आठ दिनों तक चले फूलदेई महोत्सव का समापन धार्मिक और सांस्कृतिक उत्साह के साथ हुआ। समापन दिवस पर कार्यक्रम की शुरुआत श्री काशी विश्वनाथ गुरुकुलम के विद्यार्थियों ने भगवान काशी विश्वनाथ की विशेष पूजा-अर्चना से की।

इसके बाद सभी विद्यार्थी उत्तरकाशी के न्यायाधीश गुरबख्श सिंह के आवास पहुंचे, जहां उन्होंने परंपरा के अनुसार फ्योंली समेत स्थानीय पुष्प देहरी में अर्पित कर फूलदेई पर्व की मंगलकामनाएं दीं।

इस अवसर पर न्यायाधीश गुरबख्श सिंह ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि गुरुकुलम के विद्यार्थी शिक्षा के साथ अपनी संस्कृति और परंपराओं को भी संजोए हुए हैं, जो भविष्य के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि शिक्षा जीवन का सबसे मजबूत आधार है, लेकिन इसके साथ धर्म, संस्कृति और परंपराओं का पालन भी आवश्यक है। यही हमें संस्कारवान बनाता है और जीवन मूल्यों को सुदृढ़ करता है।

महोत्सव के दौरान आयोजित निबंध प्रतियोगिता में बच्चों ने अपने अनुभव साझा किए। इसमें नंदिनी पायल ने प्रथम, अनीश भंडारी ने द्वितीय और सुजल पंवार ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। विजेताओं को काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत द्वारा सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के अंत में सभी बाल फुल्यारों को पारितोषिक वितरित किए गए। आयोजन में प्रताप सिंह बिष्ट, शैलेंद्र नौटियाल, मोहन डबराल, गोपाल रावत, गणेश सेमवाल और संजय अरोड़ा समेत कई लोगों का सहयोग रहा।

इस दौरान अनन्या बिष्ट, वैष्णवी रावत, आस्था रावत, दिव्यांशी कुड़ियाल, सत्यम राणा, आरुष डंगवाल, कृष्णा रावत, अंकित, अर्पित, सिया नौटियाल, दिया नौटियाल, रानी उनियाल, वंशिका राणा, नंदिनी पायल, आयुष राणा, सौरव बिष्ट, सुजल रावत, सानिया, मनदीप रावत, पारस कोटनाला और अंकित ममंगाई सहित कई बाल फुल्यार उपस्थित रहे।

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