
उत्तराखंड में अचानक बदले मौसम का असर अब लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी साफ दिखाई देने लगा है। लगातार बादल, धुंध और धूप की कमी के कारण लोगों में उदासी, अधिक नींद और चिड़चिड़ेपन जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। जिला चिकित्सालय के मनोरोग विभाग की ओपीडी में हाल ही में सीजनल अफेक्टिव डिसॉर्डर (SAD) के लक्षणों वाले 8 से 10 मरीज पहुंचे हैं।
क्या है SAD (सीजनल अफेक्टिव डिसॉर्डर)?
सीजनल अफेक्टिव डिसॉर्डर एक प्रकार का मौसमी अवसाद है, जो आमतौर पर सर्दियों में कम धूप और ठंडे मौसम के कारण होता है। इसके प्रमुख लक्षणों में लगातार उदासी, ऊर्जा की कमी, ज्यादा नींद आना और काम में मन न लगना शामिल हैं।
एम्स ऋषिकेश के मनोवैज्ञानिक डॉ. विशाल धीमान के अनुसार, अचानक मौसम परिवर्तन का असर करीब 20% लोगों के मस्तिष्क पर पड़ता है। धूप की कमी से मस्तिष्क में सेरोटोनिन और मेलाटोनिन हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे मूड प्रभावित होता है।
कब बन सकता है खतरा?
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह स्थिति 2–3 दिनों तक सीमित रहती है तो सामान्य मानी जाती है, लेकिन यदि लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो यह अवसाद का रूप ले सकती है और उपचार की जरूरत पड़ती है।
तनाव झेल चुके लोगों में अधिक खतरा
जिला चिकित्सालय की वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. निशा सिंगला बताती हैं कि मौसम में अचानक बदलाव के दौरान पहले से तनाव या मानसिक समस्याओं से जूझ चुके लोगों में जोखिम अधिक होता है। ऐसे मरीजों में डिप्रेशन या मैनिया के लक्षण दोबारा उभर सकते हैं। कुछ लोग अत्यधिक शांत हो जाते हैं, तो कुछ असामान्य रूप से चंचल व्यवहार करने लगते हैं।
कैसे करें बचाव?
- घर और ऑफिस में पर्याप्त रोशनी रखें
- सुबह समय पर उठने की आदत डालें
- रोजाना हल्का व्यायाम या वॉक जरूर करें
- धूप न होने पर भी बाहर निकलने की कोशिश करें
उपचार संभव
विशेषज्ञों के अनुसार, SAD का उपचार लाइट थेरेपी, काउंसलिंग और जीवनशैली में बदलाव के जरिए प्रभावी तरीके से किया जा सकता है। समय रहते पहचान और सही देखभाल से इस समस्या को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।



