
देहरादून: उत्तराखंड में शहरीकरण तेजी से विकास की नई दिशा बनता जा रहा है। शहरी क्षेत्रों में बढ़ती सुविधाओं, रोजगार के अवसरों और बेहतर जीवनस्तर के चलते अब राज्य का हर तीसरा व्यक्ति शहरों की ओर रुख कर रहा है।
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2001-02 में जहां 21.72 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में निवास करती थी, वहीं 2011-12 में यह बढ़कर 26.55 प्रतिशत हो गई। अब 2025-26 में यह आंकड़ा 36.77 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, जो तेजी से बदलते सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को दर्शाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बेहतर रोजगार, उच्च शिक्षा संस्थानों की उपलब्धता, उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं और आधुनिक जीवनशैली की चाह ने लोगों को शहरों की ओर आकर्षित किया है। पिछले एक दशक में करीब 17 लाख से अधिक लोगों का शहरों की ओर पलायन इसी बदलाव का संकेत है।
तेजी से बढ़ती शहरी आबादी के साथ सरकार भी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में जुटी है। जल आपूर्ति, सीवरेज, यातायात और कचरा प्रबंधन जैसी सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे शहरी जीवन अधिक सुगम हो सके।
संतुलित विकास की ओर बढ़ता राज्य
राज्य में शहरी क्षेत्रों की जनसंख्या वृद्धि दर 3.42 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह 1.10 प्रतिशत है। पर्यटन के क्षेत्र में भी उत्तराखंड लगातार प्रगति कर रहा है। हर वर्ष करीब 3 करोड़ पर्यटकों का आगमन न केवल अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहा है, बल्कि शहरी क्षेत्रों में रोजगार और व्यवसाय के नए अवसर भी सृजित कर रहा है।
नए शहरों के विकास पर जोर
बढ़ती आबादी के संतुलित विकास के लिए सरकार सैटेलाइट टाउन और नए शहरी केंद्र विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। Dehradun, Haridwar और Haldwani के आसपास उप-शहरी क्षेत्रों का तेजी से विस्तार किया जा रहा है, ताकि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बेहतर शहरी ढांचा तैयार किया जा सके।



