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क्यों खास हैं ये राखी

उत्तरकाशी | भाई बहनों का पवित्र त्यौहार रक्षाबंधन के अवसर पर जहां बाजार में बड़ी-बड़ी कंपनियां फैंसी राखियां बना रही हैं और बाजार में बेची जा रही है वही उत्तरकाशी मैं सामाजिक कार्यकर्ता अजय प्रकाश बड़ौला वरिष्ठ गायत्री परिजन प्रबंधक पवित्रा लीला बाल वाटिका उत्तरकाशी ने हिमालय की गाय के गोबर से बने जैविक राखियां बनाई है जो सुंदर फैंसी रंग बिरंगी डिजाइन में है इनके साथ उत्तरकाशी की प्राचीन मंदिरों की फोटो, गंगोत्री की फोटो, अक्षत चावल, एक गोबर से बनी धूपबत्ती रखी जा रही है |जिसकी कीमत ₹30 से लेकर ₹50 तक है जिसको बाजार में लोग काफी पसंद कर रहे हैं |

अजय प्रकाश बड़ौला

 

गाय के गोबर से बनी राखी शरीर में स्पर्श होने मात्र से ही  हमारे अशांत मन को शांति मिलती है और गाय के गोबर के स्पर्श से बहुत से अनेक लाभ हैं | गाय के गोबर धूपबत्ती हवन वहा कंडे जलाने से हमारे धार्मिक शास्त्रों में भी महत्व बताया गया है|  जनपद में पहली बार बनी राखियों की मांग देहरादून के इंजीनियर सुशील कंडवाल ने 100 से अधिक राखियां मंगवाई है तो वही न्यू मुंबई लायंस क्लब की अध्यक्ष श्रीमती रीनाक्षी बोढीयाल बड़ोला, श्रीमती सीमा रतूड़ी नोएडा दिल्ली, श्रीमती मीना भट्ट जयपुर ने मंगवाई है|  उत्तरकाशी में इन राशियों को बडोला गिफ्ट सेंटर मेन बाजार उत्तरकाशी में प्राप्त कर सकते हैं | साथ ही इन राज्यों से प्राप्त आय का एक अंश निर्धन गरीब बच्चों की शिक्षण सामग्री एवं गौ संरक्षण के लिए लगाया जाएगा | इससे पूर्व सन 2013 मे भी बड़ोला जी ने धार्मिक पोस्टर मे राखियों बनाई इन राखियों का प्रशिक्षण कुमारी अर्चना मुरारी , खुशी बडोला,  श्रीमती सावित्री रावत ने भी लिया है|

उत्तरकाशी में विभिन्न धार्मिक संगठनों ने इन राखियों का एक सार्थक प्रयास बताया है रक्षाबंधन के बाद जन्माष्टमी के लिए कुछ छोटे खिलौने दीपक, धूपबत्ती स्टैंड, प्रसाद के लिए विभिन्न दैनिक पुजन के लिए गाय के गोबर से बने सामग्री का निशुल्क प्रशिक्षण भी दिया जाएगा|

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