ऋषिकेश, 7 अप्रैल। विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर एम्स ऋषिकेश में कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की ओर से विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। दो दिवसीय कार्यक्रम के पहले दिन पब्लिक हेल्थ से संबंधित कार्यशालाएं और समूह चर्चा सत्र आयोजित किए गए।
मंगलवार को कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने एम्स ऋषिकेश को “वन हेल्थ” के क्षेत्र में अग्रणी केंद्र बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि संस्थान का साक्ष्य-आधारित शोध राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य नीतियों के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। इस वर्ष की थीम “Together for Health” पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि चिकित्सा, पशु चिकित्सा और पर्यावरण विज्ञान के समन्वय से ही समग्र स्वास्थ्य संभव है।
कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज, दिल्ली की प्रो. डॉ. सुनीला गर्ग ने सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में उपलब्ध 12 सेवा पैकेजों की जानकारी देते हुए कहा कि सामुदायिक भागीदारी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच में सुधार किया जा सकता है।
इस अवसर पर संस्थान के डीन एकेडमिक प्रो. सौरभ वाष्र्णेय और चिकित्सा अधीक्षक प्रो. बी. सत्या श्री ने भी विचार रखे। उन्होंने “वन हेल्थ” की अवधारणा और वर्तमान स्वास्थ्य चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे प्रयास स्वास्थ्य प्रणाली को अधिक सुदृढ़ बनाते हैं।
कम्युनिटी मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. वर्तिका सक्सैना ने बताया कि आयोजन का उद्देश्य मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के एकीकृत दृष्टिकोण को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि विभाग वयस्क टीकाकरण को प्रोत्साहित करने के लिए अनुसंधान और जनजागरूकता कार्यक्रम चला रहा है।
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने रोग निगरानी, टीकाकरण, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस, स्वच्छता और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की। प्रतिभागियों को केस स्टडी और समूह गतिविधियों के माध्यम से व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया।
इस दौरान डीन रिसर्च प्रो. शैलेंद्र हांडू, ले. कर्नल गोपाल मेहरा, प्रो. संजीव मित्तल, प्रो. रविकांत सहित कई चिकित्सक, शोधकर्ता और एमडी-एमपीएच के छात्र उपस्थित रहे।



