देहरादून। उत्तराखंड के दो बार मुख्यमंत्री रहे मेजर जनरल बीसी खंडूड़ी को देश की आधुनिक सड़क संरचना का वास्तुकार माना जाता है। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री रहते हुए उन्होंने जहां स्वर्ण चतुर्भुज परियोजना को गति दी, वहीं प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के जरिए गांवों तक सड़क पहुंचाने का बड़ा काम किया।
अटल बिहारी वाजपेयी सरकार (2000-2004) में जनरल खंडूड़ी ने सड़क परिवहन मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली। उनके कार्यकाल में दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता को जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी स्वर्ण चतुर्भुज परियोजना को तय समय सीमा में पूरा करने पर विशेष जोर दिया गया। वहीं प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों को मुख्य सड़कों से जोड़ने के अभियान में भी उनकी अहम भूमिका रही। सैन्य अनुशासन और कार्यशैली का असर इस योजना के क्रियान्वयन में साफ दिखाई दिया, जिससे खासकर पहाड़ी क्षेत्रों की कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
मुख्यमंत्री के रूप में सुशासन की छाप
जनरल खंडूड़ी 8 मार्च 2007 से 27 जून 2009 तक उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे। इसके बाद 11 सितंबर 2011 को तत्कालीन मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के इस्तीफे के बाद उन्हें दोबारा राज्य की कमान सौंपी गई।
उनका मुख्यमंत्री कार्यकाल सुशासन और पारदर्शिता के लिए याद किया जाता है। वर्ष 2011 में जब देश में अन्ना हजारे का भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन चरम पर था, तब जनरल खंडूड़ी ने उत्तराखंड में देश के सबसे सख्त लोकायुक्त विधेयकों में से एक पेश किया। इस विधेयक में मुख्यमंत्री को भी जांच के दायरे में रखा गया था।
उन्होंने सरकारी सेवाओं को तय समय पर उपलब्ध कराने के लिए कानून लागू किया, ताकि आम जनता को सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। साथ ही तबादला नीति को पारदर्शी बनाने की दिशा में भी कदम उठाए गए। उनकी कार्यशैली का मूल मंत्र था— “काम नहीं तो वेतन नहीं।”
‘खंडूड़ी है जरूरी’ बना चुनावी नारा
वर्ष 2011 में जब उत्तराखंड भाजपा की छवि विवादों के कारण प्रभावित हो रही थी, तब पार्टी आलाकमान ने दोबारा जनरल खंडूड़ी को सत्ता सौंपी। उसी दौरान “खंडूड़ी है जरूरी” का नारा पूरे राज्य में चर्चा का केंद्र बन गया।
उनके नेतृत्व में भाजपा ने 2012 विधानसभा चुनाव में मजबूत प्रदर्शन किया। हालांकि खुद जनरल खंडूड़ी को कोटद्वार सीट से मामूली अंतर से हार का सामना करना पड़ा, जिसे उत्तराखंड की राजनीति का बड़ा उलटफेर माना गया।



