देहरादून। बद्रीपुर जोगीवाला में राष्ट्रीय संत एवं भागवत कथा मर्मज्ञ डाॅ. दुर्गेश आचार्य के श्रीमुख से कथा श्रवण का आनन्द लेने देहरादून सहित उत्तराखंड के विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में नित्यप्रति श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। कथा के चौथे दिन डाॅ.दुर्गेश आचार्य ने कहा कि बच्चों को संस्कारवान शिक्षा बाल्यकाल से ही देनी चाहिए। अच्छे संस्कारों से ही कीर्ति चारों दिशाओं में फैलती है। गरीबी के परिवेश में पली संतान को यदि संस्कारवान शिक्षा मिले तो वह बड़ा होकर कुल और राष्ट्र दोनों का नाम ऊंचा कर सकता है। भारतीय इतिहास में ऐसे अनेकों उदाहरण हैं। भागवत कथा समाज के अंदर घृणा और विद्वेष को समाप्त करने का संदेश देती है। सनातन धर्म दुनिया का सर्वश्रेष्ठ धर्म है। यदि तुम धर्म की रक्षा करोगे तो धर्म तुम्हारी रक्षा करेगा। माता-पिता की सेवा से ही प्रभु की प्राप्ति होती है। माता-पिता ही घर के मंदिर के देवता हैं। सांसारिक नदी से सद्गुरु ही नौका बन कर पार लगाते हैं। संपति का भोग करने वाला सिर्फ उत्तराधिकारी हो सकता है। संस्कारवान संतान ही कुल का नाम रोशन करती है। उन्होंने ध्रुव व प्रह्लाद की जीवन कथाओं से धर्म और अधर्म के अनेकों दृष्टांत देकर श्रोताओं को अच्छे कर्म करने का आह्वान किया। कथा की समाप्ति पर भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप की आकर्षक झांकी भी निकाली गई, जिसे देख कर भक्तजन भाव विभोर हो गये। व्यास पीठ से अनेकों भक्तजनों को डाॅ. दुर्गेश आचार्य द्वारा स्मृति चिन्ह के रूप में शाॅल ओढ़ाई गई। उल्लेखनीय है कि श्रीमती ऊषा नौटियाल द्वारा अपने स्वर्गीय पति भगवती प्रसाद नौटियाल के वार्षिक श्राद्ध के अवसर पर इस श्रीमद भागवत कथा का दिव्य आयोजन नाईन पाॅम्स रिसोर्ट बद्रीपुर में करवाया जा रहा है। कथा का समापन 19 जून को होगा। मंडपाचार्य रमेश पैन्यूली ने सभी लोगों से ज्ञान यज्ञ में सम्मिलित होने का आग्रह किया।



