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हरिद्वार में हाथियों पर रहेगी रेडियो कॉलर से नजर, वन विभाग ने शुरू की विशेष योजना

Ramesh Kuriyal
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हरिद्वार। आगामी कुंभ मेला-2027 के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वन विभाग ने हरिद्वार वन प्रभाग में हाथियों की गतिविधियों पर निगरानी रखने हेतु रेडियो कॉलर तकनीक का उपयोग करने का निर्णय लिया है। इसके तहत हाथियों के झुंड का नेतृत्व करने वाले हाथी की पहचान कर उसे रेडियो कॉलर पहनाया जाएगा, जिससे पूरे झुंड की गतिविधियों पर प्रभावी नजर रखी जा सकेगी।

वन विभाग के अनुसार, हाथियों को आबादी वाले क्षेत्रों में प्रवेश से रोकने के लिए अब तक खाई खोदने, सोलर फेंसिंग और अन्य उपाय किए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे में कुंभ मेले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के सहयोग से विशेष अध्ययन शुरू किया गया है।

अध्ययन के दौरान विशेषज्ञ यह पता लगाएंगे कि हरिद्वार वन प्रभाग में हाथियों के कितने झुंड सक्रिय हैं, वे किन आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंचते हैं और उनकी आवाजाही का समय क्या है। अध्ययन पूरा होने के बाद झुंड का नेतृत्व करने वाले हाथी को रेडियो कॉलर लगाया जाएगा। इसके माध्यम से पूरे झुंड की लोकेशन पर लगातार नजर रखी जाएगी। यदि हाथियों का झुंड आबादी वाले क्षेत्र की ओर बढ़ता है, तो वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंचकर उन्हें सुरक्षित तरीके से वापस जंगल की ओर भेजेगी।

इस योजना की जानकारी शुक्रवार को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित राज्य वन्यजीव बोर्ड एवं राज्य स्तरीय बाघ संचालन समिति की बैठक में दी गई। बैठक में बताया गया कि हाथियों को रेडियो कॉलर लगाने की अनुमति के लिए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा गया है।

हरिद्वार वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) स्वप्निल अनिरुद्ध ने बताया कि यह अध्ययन मई 2026 से चल रहा है। भारतीय वन्यजीव संस्थान झुंड का नेतृत्व करने वाले हाथी की पहचान करेगा, जिसके बाद उसे रेडियो कॉलर पहनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि संस्था ने इस परियोजना के लिए चार रेडियो कॉलर उपलब्ध करा दिए हैं। इससे पहले पिछले कुंभ मेले के दौरान भी चार हाथियों पर रेडियो कॉलर लगाकर उनकी गतिविधियों की निगरानी की गई थी।

वन विभाग का मानना है कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से कुंभ मेले के दौरान मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को कम करने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण सफलता मिलेगी।

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