देहरादून। उत्तराखंड के जनकवि और सांस्कृतिक आंदोलनकारी गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ को इस संसार से विदा हुए 16 वर्ष बीत गए हैं। 22 अगस्त 2010 को गिर्दा जनआंदोलनों और जनचेतना की ऐसी विरासत छोड़कर अनंत यात्रा पर चले गए, जो आज भी लोगों के बीच जीवित है। उनका शरीर भले ही हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनकी रचनाएं, जनगीत और विचार आज भी सामाजिक एवं सांस्कृतिक चेतना को नई दिशा दे रहे हैं।
गिर्दा बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे। वे कवि, गद्यकार, नाटककार, रंगकर्मी, अभिनेता, निर्देशक, संगीतकार और लोकगायक होने के साथ-साथ एक संवेदनशील आंदोलनकारी भी थे। इसके साथ ही उनका व्यक्तित्व बेहद सरल, सहज, निर्विकार और मानवीय था। उन्होंने अपने जीवन में फकीरी और साधना का ऐसा रास्ता चुना, जिसमें दिखावे और प्रतिस्पर्धा के लिए कोई स्थान नहीं था।
जनगीत बने आंदोलनों की आवाज
सांस्कृतिक और सामाजिक बदलाव के लिए उपलब्ध लगभग हर मोर्चे पर गिर्दा सक्रिय रहे। कविता और जनगीत उनके संघर्ष का प्रमुख माध्यम थे। हिंदी और कुमाउंनी में लिखे उनके गीतों ने उत्तराखंड आंदोलन के दौरान लोगों में राजनीतिक चेतना, प्रतिरोध और परिवर्तन की भावना को मजबूत किया।
गिर्दा केवल गीत लिखने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि अपने जनगीतों के साथ आंदोलनों में सक्रिय भागीदारी भी निभाते रहे। उनके गीत आम लोगों की आवाज बने और आंदोलनकारियों में जोश भरने का काम किया। यही वजह है कि आज भी उत्तराखंड के सामाजिक और सांस्कृतिक आंदोलनों का जिक्र गिर्दा के बिना अधूरा माना जाता है।
स्मृतियों और चेतना में हमेशा रहेंगे
गिर्दा का व्यक्तित्व इतना व्यापक था कि उन्हें कुछ पंक्तियों या किसी एक विधा में समेटना संभव नहीं है। उनके साथ आंदोलनों और विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों में रहने वाले लोग आज भी उनके व्यक्तित्व और विचारों को याद करते हैं।
लेखक मदन मोहन बिजल्वाण ने कहा कि गिर्दा से उनका संबंध केवल परिचय तक सीमित नहीं था, बल्कि मन और मस्तिष्क दोनों का रिश्ता था। कई आंदोलनों और कार्यक्रमों में उनके साथ रहने का अवसर मिला। गिर्दा आज भी उनकी स्मृतियों, चेतना और सामाजिक सरोकारों में उसी तरह जीवित हैं।
उन्होंने कहा कि गिर्दा भले ही 22 अगस्त 2010 को इस परिवर्तनशील संसार से विदा हो गए, लेकिन उनकी रचनाएं और विचार आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करते रहेंगे। जनचेतना और सामाजिक बदलाव की लड़ाई में उनकी विरासत हमेशा प्रासंगिक रहेगी।



