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‘खेल को हाँ, नशे को ना’ अभियान के साथ दून विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय खेल दिवस का शुभारंभ

Ramesh Kuriyal
9 Min Read

देहरादून, राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर युवाओं को नशे की बढ़ती प्रवृत्ति से दूर रखने तथा खेलों को स्वस्थ एवं संतुलित जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा बनाने के उद्देश्य से दून विश्वविद्यालय में ‘खेल को हाँ, नशे को ना’ अभियान के अंतर्गत राष्ट्रीय खेल दिवस का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का आयोजन नित्यानंद सभागार, दून विश्वविद्यालय में किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में बास्केटबॉल एवं वॉलीबॉल कोर्ट का उद्घाटन भी कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल द्वारा किया गया, जिससे विद्यार्थियों को खेल गतिविधियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को बल मिला।

दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थान केवल शिक्षा के केंद्र नहीं होते, बल्कि युवाओं के व्यक्तित्व निर्माण, मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक जिम्मेदारी और जीवन कौशल के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने कहा कि खेल विद्यार्थियों को अपनी ऊर्जा और प्रतिभा को सकारात्मक दिशा में लगाने का अवसर प्रदान करते हैं। खेलों के माध्यम से अनुशासन, आत्मविश्वास और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से स्वयं नशे से दूर रहने तथा अपने मित्रों और समाज में भी नशे के विरुद्ध जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नशामुक्त वातावरण का निर्माण किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और समाज के सभी वर्गों को मिलकर प्रयास करना होगा।

बास्केटबॉल एवं वॉलीबॉल कोर्ट का उद्घाटन इस आयोजन का विशेष आकर्षण रहा। कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने दोनों खेल सुविधाओं का उद्घाटन करते हुए विद्यार्थियों को खेलों में अधिक से अधिक भागीदारी के लिए प्रेरित किया। नए खेल मैदान विद्यार्थियों को नियमित अभ्यास, प्रशिक्षण एवं प्रतियोगिताओं के लिए बेहतर अवसर प्रदान करेंगे। विश्वविद्यालय द्वारा खेल सुविधाओं के विस्तार को विद्यार्थियों के शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ उनके मानसिक स्वास्थ्य और सकारात्मक जीवनशैली से भी जोड़ा जा रहा है।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित पुलिस अधीक्षक जया बलूनी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि नशे की समस्या केवल कानून-व्यवस्था अथवा स्वास्थ्य से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि यह युवाओं के भविष्य, परिवार और पूरे समाज को प्रभावित करने वाली गंभीर चुनौती है। उन्होंने कहा कि नशे की शुरुआत कई बार जिज्ञासा, मित्रों का दबाव, तनाव, अकेलापन अथवा समस्याओं से बचने की कोशिश के कारण होती है और धीरे-धीरे यह व्यक्ति के व्यवहार तथा जीवनशैली का हिस्सा बन सकती है।

उन्होंने विद्यार्थियों से नशे से दूर रहने तथा अपने मित्रों और साथियों को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि किसी युवा में नशे की समस्या दिखाई देती है तो उसे उपेक्षित अथवा अपमानित करने के बजाय उचित सहायता और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

नशे की लत के पीछे के मनोवैज्ञानिक कारणों को समझना आवश्यक

कार्यक्रम में वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक डॉ. राजेश भट्ट ने विद्यार्थियों को नशे की लत के मनोवैज्ञानिक कारणों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नशे की लत को केवल व्यक्ति की इच्छाशक्ति की कमी मानना उचित नहीं है। इसके पीछे तनाव, भावनात्मक समस्याएं, साथियों का दबाव, आवेगशीलता, तत्काल सुख प्राप्त करने की प्रवृत्ति तथा मस्तिष्क की पुरस्कार प्रणाली जैसे अनेक मनोवैज्ञानिक एवं जैविक कारक कार्य करते हैं।

डॉ. भट्ट ने बताया कि नशे का सेवन कई बार व्यक्ति को कुछ समय के लिए तनाव, चिंता अथवा भावनात्मक परेशानी से राहत का अनुभव कराता है। यही अस्थायी राहत धीरे-धीरे एक ऐसे चक्र को जन्म दे सकती है जिसमें व्यक्ति तनाव की स्थिति में बार-बार नशे की ओर जाने लगता है।

उन्होंने विद्यार्थियों को इस चक्र से बचने के लिए खेल, व्यायाम, ध्यान, पर्याप्त नींद, रचनात्मक गतिविधियों, सामाजिक सहयोग तथा आवश्यकता पड़ने पर मनोवैज्ञानिक परामर्श लेने की सलाह दी।

उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल यह कहना पर्याप्त नहीं है कि ‘नशा मत करो’, बल्कि उन्हें तनाव, असफलता, अकेलेपन और भावनात्मक दबाव से निपटने के स्वस्थ एवं सकारात्मक तरीके भी सिखाने आवश्यक हैं।

खेल युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देते हैं

विश्वविद्यालय के खेल क्लब की संयोजक डॉ. शांकी चंद्रा ने खेलों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि खेल केवल शारीरिक स्वास्थ्य और प्रतियोगिता तक सीमित नहीं हैं। खेल विद्यार्थियों में अनुशासन, सहयोग की भावना, आत्मविश्वास, धैर्य और कठिन परिस्थितियों से निपटने की क्षमता विकसित करते हैं।

उन्होंने कहा कि युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने में खेलों की महत्वपूर्ण भूमिका है। नियमित खेल गतिविधियां तनाव कम करने, स्वस्थ दिनचर्या विकसित करने तथा विद्यार्थियों को सकारात्मक सामाजिक वातावरण से जोड़ने में सहायक होती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से विश्वविद्यालय की विभिन्न खेल गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया।

खेलों के दौरान चोट से बचाव की जानकारी

कार्यक्रम में शारीरिक उपचार विशेषज्ञ डॉ. आरुषि ने खेलों के दौरान होने वाली चोटों तथा उनसे बचाव के उपायों की जानकारी विद्यार्थियों को दी। उन्होंने खेल शुरू करने से पहले शरीर को तैयार करने वाले व्यायाम, खिंचाव वाले व्यायाम, पर्याप्त पानी पीने, शरीर की क्षमता को समझने तथा चोट लगने पर समय पर उचित उपचार लेने के महत्व पर प्रकाश डाला।

उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि किसी भी चोट अथवा लगातार बने रहने वाले दर्द को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर उचित उपचार लेने से चोट को गंभीर होने से रोका जा सकता है और खिलाड़ी सुरक्षित रूप से अपनी गतिविधियां जारी रख सकता है।

नशामुक्त और स्वस्थ विश्वविद्यालय परिसर का संकल्प

कार्यक्रम की संयोजक प्रो. रीना सिंह ने कहा कि ‘खेल को हाँ, नशे को ना’ अभियान का उद्देश्य विद्यार्थियों के बीच ऐसा सकारात्मक वातावरण तैयार करना है, जहां खेल, स्वास्थ्य और मानसिक मजबूती जीवन का हिस्सा बनें।

उन्होंने कहा कि नशे के विरुद्ध जागरूकता केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसके लिए निरंतर जागरूकता कार्यक्रम, खेल गतिविधियां, मनोवैज्ञानिक सहयोग तथा विद्यार्थियों के साथ नियमित संवाद आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी केवल विद्यार्थियों को शैक्षणिक ज्ञान प्रदान करना नहीं है, बल्कि उन्हें स्वस्थ, जिम्मेदार और आत्मनिर्भर नागरिक बनाने की दिशा में भी कार्य करना है।

विश्वविद्यालय के वरिष्ठ शिक्षकों की रही उपस्थिति

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अनेक वरिष्ठ शिक्षक एवं अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में प्रो. आर. पी. ममगाईं, प्रो. एच. सी. पुरोहित, प्रो. चेतना पोखरियाल, प्रो. हर्ष डोभाल, आबसार अब्बासी सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने ‘खेल को हाँ, नशे को ना’ के संदेश को अपनाने तथा अपने साथियों एवं समाज में भी नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।

राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम युवाओं को यह संदेश देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रहा कि स्वस्थ शरीर, संतुलित मन, सकारात्मक सोच और जीवन में स्पष्ट लक्ष्य ही युवा शक्ति की वास्तविक पहचान हैं। बास्केटबॉल और वॉलीबॉल कोर्ट के उद्घाटन के साथ विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों को खेलों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और खेलों को स्वस्थ एवं नशामुक्त जीवनशैली के प्रभावी माध्यम के रूप में बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया।

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