प्रयागराज। फ़िराक़ गोरखपुरी उर्दू दुनिया के पहले शायर थे, जिन्हें ज्ञानपीठ अवार्ड मिला। उनसे पहले उर्दू के किसी भी शायर को ज्ञानपीठ अवार्ड नहीं मिला। फ़िराक़ गोरखपुरी ने अपनी शायरी से एक नए तरह का नज़रिया पेश किया, जो उन्हें दूसरे शायरों से अलग करता है। ख़ासतौर पर उन्होंने ग़ज़ल की शायरी में एक नई रोशनी पैदा की। उनकी रूबाइयों का अंदाज़ भी सबसे अलग है। यह बात शुक्रवार की शाम शहर के करैली में साहित्यिक संस्था गुफ़्तगू की ओर आयोजित संगोष्ठी में वरिष्ठ साहित्यकार-पत्रकार लईक़ रिज़वी ने कही।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी ने फ़िराक़ गोरखपुरी को अपने दौर का सबसे बड़ा शायर बताया है। उनका कहना था कि फ़िराक़ जितनी अपनी के लिए जाने जाते हैं, उससे अधिक अपनी शख्सियत के लिए जाने जाते हैं। उनके यहां आने-जाने वालों को तांता लगा रहता था। वरिष्ठ शायर सुनील दानिश ने कहा कि फ़िराक़ गोरखपुरी की शायरी को पढ़कर-सुनकर बहुत कुछ सीखा-समझा जा सकते हैं। हकीम रेशादुल इस्लाम ने कहा फ़िराक़ साहब के देहांत के बाद हम उनके घर गए थे, उस समय प्रयागराज के हिन्दी-उदू के सभी बड़े शायर और कवि मौजूद थे। धीरेंद्र सिंह नागा, डॉ. एस.एम. अब्बास और अफ़सर जमाल ने भी विचार व्यक्त किए।
फोटो कैप्सन: विचार व्यक्त करते लईक़ रिज़वी।



