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एम्स सेटेलाइट सेंटर किच्छा में भर्ती घोटाला

Sarthak Prayash Admin
3 Min Read

ऋषिकेश एम्स (AIIMS) के किच्छा स्थित सेटेलाइट सेंटर में नियुक्तियों के नाम पर चल रहे फर्जीवाड़े की जांच में अब अहम मोड़ आ गया है। पुलिस की जांच अब एम्स में ही काम कर रही आउटसोर्सिंग एजेंसी ‘राजदीप एंटरप्राइजेज’ के मैनेजर के इर्द-गिर्द सिमट गई है। प्रारंभिक जांच में आउटसोर्स एजेंसी के मैनेजर समेत दो लोगों को इस पूरे रैकेट का मुख्य सूत्रधार माना जा रहा है।

आउटसोर्स एजेंसी पर शुरुआत से ही था शक किच्छा सेटेलाइट सेंटर में फर्जी भर्तियों का मामला सामने आते ही ‘राजदीप एंटरप्राइजेज’ की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही थी। जिन लोगों को ठगा गया, उनके पास से बरामद नियुक्ति पत्रों पर इसी एजेंसी की मुहर (स्टाम्प) लगी हुई थी। हैरान करने वाली बात यह है कि मामला उजागर होने के बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बावजूद, एजेंसी के अधिकारी पूरे मामले पर रहस्यमयी चुप्पी साधे हुए थे।

पूछताछ में हुए अहम खुलासे:

  • पैसों का लेन-देन: गिरफ्तार आरोपी दीपक गुसाईं (जो खुद एम्स की आयुष्मान योजना में आउटसोर्स कर्मचारी है) ने पुलिस पूछताछ में कबूला है कि उसने नौकरी के नाम पर कई लोगों से पैसे वसूले और उसमें से 2,40,000 रुपये शिवा सिंह नाम के व्यक्ति को दिए।

  • मैनेजर की संलिप्तता: दूसरे आरोपी सुब्रत बछाड़ ने खुलासा किया है कि उसने अपनी और अन्य लोगों की नौकरी के लिए पैसे दिए थे। इसके बाद, संबंधित लोगों की मुलाकात शिवा सिंह और ‘राजदीप एंटरप्राइजेज’ के मैनेजर विनायक से कराई गई थी।

एम्स परिसर से चल रहा था नेटवर्क, उठ रहे गंभीर सवाल जांच में सामने आए तथ्यों से यह स्पष्ट हो रहा है कि यह पूरा गोरखधंधा एम्स परिसर के भीतर से ही संचालित हो रहा था। शिवा सिंह भी पूर्व में आउटसोर्स एजेंसी के जरिए एम्स में काम कर चुका है। अब यह आशंका भी जताई जा रही है कि क्या ये नियुक्तियां वाकई फर्जी थीं, या फिर मोटी रकम लेकर पिछले दरवाजे से असली नियुक्तियां ही की जा रही थीं? यदि ऐसा है, तो इसमें एम्स के किसी रसूखदार अधिकारी की मिलीभगत से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

कंपनी की मुहर लगाने के ऊपर से मिले थे निर्देश सूत्रों के अनुसार, आउटसोर्स कंपनी की एक महिला कर्मचारी ने पुलिस को दिए बयान में बताया है कि नियुक्ति पत्रों पर कंपनी की ही मुहर लगाई गई थी। इसके लिए बाकायदा कंपनी के ही किसी प्रभावशाली व्यक्ति द्वारा निर्देश दिए गए थे। हालांकि पुलिस ने आधिकारिक तौर पर अभी इसकी पुष्टि नहीं की है, लेकिन अगर यह सच है तो यह साफ हो जाता है कि आउटसोर्स एजेंसी के अधिकारी ही इस पूरे फर्जीवाड़े के मुख्य कर्ताधर्ता हैं।

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