
श्रीनगर। पूर्व शिक्षा मंत्री भारत सरकार एवं पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराखंड डॉ रमेश पोखरियाल निशंक ने श्रीनगर गढ़वाल में ‘शिक्षा संवाद’ कार्यक्रम की छटी कड़ी के रूप में गढ़वाल विश्वविद्यालय में शिक्षकों, विद्यार्थियों और देश के कई राज्यों से आए हुए ‘गंगा गाइड’ प्रशिक्षकों से संवाद किया।
इस अवसर पर डॉ निशंक ने बताया कि भारतीय मूल्यों संस्कृति पर और भारतीय परंपरागत ज्ञान से शिक्षा नीति भारत को विश्व गुरु के रूप में स्थापित करेगी। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की प्रसन्नता है कि हिमालय राज्यों के लिए एक अलग ढांचागत अवस्थापना की आवश्यकता थी उसके लिए उत्तराखंड एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय आगे बढ़कर नेतृत्व कर हिमालय राज्यों के विकास के लिए एक नया मॉडल प्रस्तुत करेगा। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में हमने पर्यावरण संरक्षण एवं उसकी रक्षा के लिए विशेष ध्यान दिया है और इस बात की चिंता कर इसको सुनिश्चित किया है कि जहां विकास की अवधारणा को धरातल पर उतारा जाए वही हम अपने पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी की चिंता करें।
डॉ निशंक ने यह भी बताया कि गंगा न केवल भारत को परंतु भारतीय उपमहाद्वीप के लोगों को नया जीवन प्रदान करती है व हिमालय एशिया के वॉटर टावर के रूप में काम करता है जो दुनिया के कई देशों की भूख और प्यास मिटाता है।
