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अनिंद्र पर कैसे पाए विजय

सम्पूर्ण विश्वा मे लोगो की एक बड़ी संख्या अनिद्रा नामक रोग से पीड़ित है। आज कल के भाग दौड़ के बीच एवं खराब जीवन सैली के कारण, नींद के लिए पर्याप्त समय ना मिलने के कारण उसका प्रभाव लगभग सभी व्यक्तियों पर पड़ रहा है आयुर्वैद मे वर्णित तीन उपस्तम्भो मे से एक महत्वपूर्ण स्तम्भ निद्रा भी है जो की शारीरिक मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य हेतु अति आवश्यक है। मानव शरीर के तीन दोष वात, पित , कफ का सम्बन्ध निद्रा से है। इन त्रीदोषों मे यदि समता न हो तो इसका सीधा प्रभाव निद्रा की गुणवक्ता एवं समय अवधी पर पड़ता है जिससे बिभिन प्रकार के शारीरिक एवं मानसिक रोग उत्पन्न हो सकते है। आयुर्वैद मे निद्रा का सही समय कफ काल को बताया गया है।जो की रात्रि में 9 से 11 के बीच का होता है इसलिए सभी को इस समय अवधी में सोने का प्रयास करना चाहिए। पंचकर्म जो की आयुर्वैद की एक महत्वपूर्ण विधा है जिसके माध्यम से अनिद्रा नामक व्याधि का ठीक प्रकार से प्रबंधन किया जा सकता है। विशेष रूप से सिरोधारा नामक थेरेपी से अनिद्रा के रोगी लाभान्वित हो सकते है। श्री आयुष हॉस्पिटल मे world sleep day के अवसर पर एक संगोष्ठी आयोजित की गयी जिसमे सस्थान के वरिष्ठ आयुर्वैदिक एवं पंचकर्म विषेसज्ञा डॉक्टर जे०एन० नौटियाल ,डा उपकार कुकरेती, एवं पैरामेडिकल स्टॉफ काफ़ी संख्या में लोग उपस्थित लोगो के साथ साथ विद्यार्थीगन्न् भी उपस्थित रहे ।

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