नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य को अतिक्रमण पर विधानसभा में प्रश्न उठाने का किया अनुरोध: विजयपाल सजवाण

Ramesh Kuriyal
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गंगोत्री क्षेत्र के पूर्व विधायक व उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजयपाल सजवाण ने आज नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य से मुलाक़ात कर उत्तराखंड सहित जनपद उत्तरकाशी मे अतिक्रमण ध्वस्तीकरण के खिलाफ इस मानसून सत्र मे विधानसभा मे अध्यादेश के साथ कानून लाये जाने के सन्दर्भ मे पत्र प्रेषित किया।

पत्र के माध्यम से उन्होंने कहा कि मा0 उच्च न्यायालय के आदेशानुसार उत्तराखंड प्रदेश मे सभी जिलाधिकारियों व डीएफओ को नेशनल व स्टेट हाईवे सहित अन्य सड़कों तथा नदियों के किनारे सरकारी व वन भूमि पर किया गया अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिये गये है। जिस क्रम मे जनपद उत्तरकाशी के विभिन्न राजमार्गों पर स्थानीय प्रशासन द्वारा गठित टीम के नेतृत्व मे अतिक्रमण ध्वस्तीकरण व चिन्हीकरण कार्य गतिमान है।

उन्होंने कहा कि इस फैसले से जनपद उत्तरकाशी मे सडक किनारे वर्षों से जीवन यापन कर रहे लोगों के घरों व प्रतिष्ठानों को हटाने से जिले के हजारों परिवार बेघर हो रहे है।

पहाड़ों मे रोजगार के सीमित साधन है, नीचे नदी व ऊपर पहाड़! ऐसी स्थिति मे लोग चारधाम यात्रा मार्ग पर दुकाने चलाकर आजीविका चला रहे है। किन्तु अचानक हुई इस तरह की कार्यवाही से वर्षों से जीवन यापन कर रहे लोगों पर रोजी रोटी का गहन संकट उत्पन्न हो जायेगा। तीन चार पीढ़ियों से चल रही दुकानों व मकानों को प्रशासन द्वारा अचानक चिन्हित कर हटाने के आदेश से पूरे इलाके मे अफरा तफरी का माहौल है।

उन्होंने नेता प्रतिपक्ष को बताया कि इनमे से कई भवन ऐसे भी है जो लीज व सरकारी आवंटन पर बने है, तथा समय-समय पर सरकार के विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित भी है। सरकारी बिभागों ने ही इन्हे बिजली पानी जैसी सुबिधायें भी दी है, साथ ही बिभिन्न बैंकों से ऋण और सब्सिडी भी मिली है और आज भी कई प्रतिष्ठानों की ऋण आदायगी जारी है। ऐसे मे इन सभी को कैसे अवैध माना जा सकता है?

उन्होंने बताया कि आवश्यक जगहों से अतिक्रमण हटाने के वे भी हिमायती है किन्तु जो लोग पिछले 50-60 वर्षों व पीढ़ियों से अपना प्रतिष्ठान चला रहे है उन्हे अचानक हटाना किसी भी तरह से न्यायसंगत नहीं है।

उन्होंने विधानसभा मे नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य से जनपद उतरकाशी सहित पूरे प्रदेश मे अतिक्रमण ध्वस्तीकरण की कार्यवाही पर जनहित को मध्यनजर रखते हुए इस मानसून सत्र मे प्रश्न उठाकर सरकार से अध्यादेश लाने की कार्यवाही करने की बात कही।

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