उत्तराखंड में श्रमिकों के लिए नए नियम: 10 घंटे से ज्यादा काम पर ओवरटाइम अनिवार्य, न्यूनतम मजदूरी का वैज्ञानिक फॉर्मूला तय

Ramesh Kuriyal
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देहरादून। उत्तराखंड में श्रमिकों के हित में बड़ा कदम उठाते हुए श्रम विभाग ने उत्तराखंड मजदूरी संहिता नियमावली 2026 का मसौदा जारी कर दिया है। प्रस्तावित नियमों के तहत अब किसी भी श्रमिक से एक दिन में अधिकतम 10 घंटे और सप्ताह में 48 घंटे से अधिक काम नहीं लिया जा सकेगा। इसके बाद किए गए कार्य पर ओवरटाइम के रूप में अलग से भुगतान करना अनिवार्य होगा।

सरकार ने इस नियमावली पर आम जनता से सुझाव मांगे हैं। इच्छुक व्यक्ति अधिसूचना जारी होने के 30 दिनों के भीतर अपनी आपत्तियां या सुझाव सचिव, श्रम विभाग या श्रम आयुक्त को ई-मेल के माध्यम से भेज सकते हैं।


ओवरटाइम पर मिलेगा दोगुना भुगतान

नए नियमों के अनुसार, यदि कोई श्रमिक निर्धारित समय से अधिक काम करता है तो उसे सामान्य मजदूरी की तुलना में दोगुनी दर से भुगतान किया जाएगा। साथ ही, लगातार छह घंटे कार्य करने के बाद कम से कम आधे घंटे का विश्राम देना भी अनिवार्य होगा।


न्यूनतम मजदूरी तय करने का वैज्ञानिक आधार

अब न्यूनतम मजदूरी केवल अनुमान के आधार पर नहीं, बल्कि वैज्ञानिक मानकों के अनुसार तय की जाएगी। इसमें निम्न बिंदुओं को शामिल किया गया है:

  • प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 2700 कैलोरी की आवश्यकता

  • प्रति परिवार सालाना 66 मीटर कपड़ा

  • भोजन और कपड़े के खर्च का 10% आवास किराया

  • बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और मनोरंजन के लिए कुल मजदूरी का 25% अतिरिक्त प्रावधान


परिवार की परिभाषा का दायरा बढ़ा

नई नियमावली में परिवार की परिभाषा को भी विस्तारित किया गया है। अब इसमें शामिल होंगे:

  • पति-पत्नी

  • 21 वर्ष तक के आश्रित पुत्र

  • अविवाहित पुत्रियां

  • दिव्यांग संतान

  • आश्रित माता-पिता

  • महिला श्रमिक के मामले में सास-ससुर भी

इससे सरकारी योजनाओं का लाभ पूरे परिवार तक पहुंच सकेगा।


श्रमिकों की नई श्रेणी जोड़ी गई

अब तक श्रमिकों को तीन श्रेणियों—अकुशल, अर्द्धकुशल और कुशल—में बांटा जाता था। नई नियमावली में चौथी श्रेणी अत्यधिक कुशल श्रमिक भी जोड़ी गई है। इसमें विशेष दक्षता और निर्णय क्षमता रखने वाले श्रमिक शामिल होंगे, जिन्हें बेहतर वेतन और सुविधाएं मिलेंगी।

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