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उत्तरकाशी में बंदरों का बढ़ता आतंक: फसलें बर्बाद, लोगों पर हमले, स्थायी समाधान की उठी मांग

Ramesh Kuriyal
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उत्तरकाशी। उत्तरकाशी नगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बंदरों का बढ़ता आतंक अब आम लोगों के लिए गंभीर समस्या बन गया है। बंदरों के लगातार आक्रामक होते व्यवहार से लोगों का दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। घरों में घुसकर खाद्य सामग्री ले जाना, खेतों में फसलों को नुकसान पहुंचाना और राहगीरों, महिलाओं तथा बच्चों पर हमला करना अब आम घटनाएं बन गई हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बंदरों के हमलों में कई लोग घायल हो चुके हैं। घायल लोगों को रैबीज के इंजेक्शन लगवाने पड़ रहे हैं, जिससे लोगों में भय का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार खेतों में काम करने वाली महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों पर बंदरों के हमले लगातार बढ़ रहे हैं।

लोगों का कहना है कि स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि महिलाएं घरों की छत पर कपड़े सुखाने तक से डर रही हैं। कई बार बंदर अचानक हमला कर देते हैं, जिससे छत से गिरकर चोटिल होने का भी खतरा बना रहता है।

किसानों के सामने भी बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। ग्रामीणों के अनुसार बंदर फल, सब्जियां और अन्य कृषि फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। मेहनत से तैयार की गई फसलें कुछ ही समय में नष्ट हो जाती हैं, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक तनाव भी झेलना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में बंदरों की बढ़ती समस्या अब केवल वन्यजीव प्रबंधन का विषय नहीं रह गई है। इसका सीधा असर जनसुरक्षा, कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पलायन जैसी गंभीर समस्याओं पर पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि बंदरों की बढ़ती संख्या और उनके आतंक को नियंत्रित करने के लिए दीर्घकालिक एवं प्रभावी कार्ययोजना बनाई जाए। उनका कहना है कि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो पहाड़ों में लोगों का जीवन और खेती-किसानी दोनों संकट में पड़ सकते हैं।

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