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नशा मुक्ति कार्यक्रमों के मुख्य अतिथि पहले लें नशामुक्ति की शपथ

Ramesh Kuriyal
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नई टिहरी। ‘शराब नहीं संस्कार’ मुहिम के तहत भाजपा उत्तराखंड के एनजीओ प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक सुशील बहुगुणा ने नशामुक्ति कार्यक्रमों को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि भविष्य में होने वाले प्रत्येक नशामुक्ति कार्यक्रम में मुख्य अतिथि को मंच पर आने से पहले सार्वजनिक रूप से नशामुक्ति की शपथ लेनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि मुख्य अतिथि को यह संकल्प लेना चाहिए कि वह स्वयं शराब, तंबाकू और किसी भी प्रकार के नशे का सेवन नहीं करता है और भविष्य में भी इससे दूर रहेगा। इसके बाद ही उसे मंच से लोगों को नशा छोड़ने का संदेश देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति स्वयं नशे से दूर रहेगा, वही समाज को नशामुक्ति का प्रभावी और विश्वसनीय संदेश दे सकता है।

बहुगुणा ने कहा कि किसी भी सामाजिक अभियान की सबसे बड़ी ताकत उसकी विश्वसनीयता होती है। जब मंच पर मौजूद व्यक्ति स्वयं उन मूल्यों का पालन करता है, जिनकी अपेक्षा वह समाज से करता है, तो उसका संदेश अधिक प्रभावी होता है। नशामुक्ति का संदेश देने वाले व्यक्ति के आचरण का युवाओं, विद्यार्थियों और आम लोगों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि ‘शराब नहीं संस्कार’ मुहिम का उद्देश्य केवल शराब और अन्य नशों के दुष्प्रभावों के प्रति लोगों को जागरूक करना नहीं है, बल्कि समाज में ऐसी सकारात्मक संस्कृति विकसित करना है, जिसमें नशामुक्त जीवन को सम्मान और संस्कारित जीवनशैली को पहचान मिले।

बहुगुणा ने कहा कि नशे के कारण कई परिवार आर्थिक, सामाजिक और मानसिक संकटों से जूझ रहे हैं। घरेलू कलह, सड़क दुर्घटनाएं, अपराध, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और युवाओं का भविष्य प्रभावित होना जैसी कई समस्याएं नशे से जुड़ी हैं। ऐसे में नशामुक्ति के प्रयासों में समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी जरूरी है।

उन्होंने सुझाव दिया कि विद्यालयों, महाविद्यालयों, ग्राम सभाओं, नगर निकायों, सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं और सरकारी विभागों के नशामुक्ति कार्यक्रमों में ऐसे लोगों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जो अपने जीवन से नशामुक्ति की मिसाल पेश करते हों। ऐसे लोगों को मंच और सम्मान मिलने से समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा और युवाओं को प्रेरणा मिलेगी।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि प्रत्येक नशामुक्ति कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि, आयोजकों और उपस्थित लोगों की सामूहिक नशामुक्ति शपथ से हो। इससे कार्यक्रम महज औपचारिकता न रहकर जनसंकल्प का रूप ले सकेगा।

बहुगुणा ने सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक और स्वयंसेवी संगठनों से नशामुक्ति को केवल अभियान नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक यदि स्वयं से शुरुआत कर अपने परिवार और समाज को नशामुक्त बनाने का संकल्प ले, तो उत्तराखंड को नशामुक्त राज्य बनाने का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

सुशील बहुगुणा

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