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अयोध्या के यज्ञ में उत्तरकाशी के घनपाठी श्रीनिवास जी का आचार्यत्व, उत्तरप्रदेश सरकार “वेद पण्डित” की उपाधि से कर चुकी है सम्मानित

Ramesh Kuriyal
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अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर निर्माण कार्य अपने अन्तिम चरण में चल रहा है। इसी निमित्त अयोध्या में नव निर्मित श्रीराम जन्मभूमि परिसर में सृष्टि के आदि से परमात्म प्रदत्त चारों वेदों संहिताओं का यज्ञ दिनांक २१ नवम्बर २००२३ से प्रारम्भ हुआ। जिसमें सर्वप्रथम ऋग्वेद संहिता पारायण एवं “ऋग्वेद संहिता यज्ञ” 25 नवम्बर को सम्पन्न हुआ । इस “ऋग्वेद संहिता यज्ञ” का आचार्यत्व उत्तरकाशी जनपद के भेटियारा-धौन्तरी निवासी ऋग्वेद के सलक्षण घनपाठी विद्वान वेदमूर्ति श्री श्रीनिवास पैन्यूली जी ने किया । यह उत्तरकाशी ही नहीं समस्त उत्तराखंड राज्य के लिए एक ऐतिहासिक गौरव का विषय बन गया है ।

यह यज्ञ कर्नाटक, तमिलनाडु, आन्ध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों के मूर्धन्य वैदिक विद्वानों के द्वारा सम्पन्न करवाया गया । श्रीनिवास पैन्यूली पुत्र श्री कमलेश्वर प्रसाद पैन्यूली एवं श्रीमती कुन्ती देवी के द्वितीय पुत्र हैं जिनका पूर्व ग्राम – लिखवार गांव,भदूरा, टिहरी गढ़वाल जनपद में पड़ता है । पंडित श्रीनिवास जी ने सुदूर समुद्र तट पर स्थित श्री मेधा दक्षिणामूर्ति वेदभवन, संस्कृत महाविद्यालय-गोकर्ण, कर्नाटक राज्य में १९९० से १९९९-२००० तक ऋग्वेद का सलक्षण घनान्त अध्ययन पूर्ण किया है । यह उत्तर भारत के मूर्धन्य वैदिक विद्वानों में गिने जाते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार पूर्व में ही इन्हें “वेद पण्डित” सम्मान से सम्मानित कर चुकी है।

सम्पूर्ण भारत वर्ष के अनेक राज्यों के वैदिक सम्मेलनों में यह अनेक बार विद्वत् सम्मान प्राप्त कर चुके हैं। आज समस्त जलकुर घाटी, उत्तरकाशी जनपद एवं उत्तराखंड राज्य गौरवान्वित है कि हमारे बीच भी वेदों के ऐसे मूर्धन्य विद्वान हैं जिन पर गौरव की अनुभूति कर सकते हैं। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि परिसर में चलने वाला यह चतुर्वेद संहिता पारायण एवं यज्ञ क्रमशः १५ जनवरी २०२४ तक निरन्तर जारी रहेगा । विश्वनाथ पूर्व सैनिक समिति के मीडिया प्रभारी गोपेश्वर प्रसाद भट्ट ने ख़ुशी जाहिर करते हुए कहा कि मुझे गर्व है कि हमारे ग्राम सभा भेटियारा -धौन्तरी ऋग्वेद संहिता यज्ञ, के संरक्षण घनपाठी विद्रान वेदमूर्ति श्री निवास पैनूली जी को मैं विश्वनाथ पूर्व सैनिक समिति की ओर से शुभकामनाएं देता हूँ और आपका बहुत बहुत आभारी हूं।

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