नेशनल मेडिकल काउंसिल- एनएमसी के दिशानिर्देशों पर तीर्थंकर महावीर मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर- टीएमएमससीआरसी के मेडिकल एजुकेशन यूनिट- एमईयू की ओर से बेसिक कोर्स इन मेडिकल एजुकेशन- बीसीएमई पर तीन-दिनी वर्कशॉप में आइस ब्रेकिंग और ग्रुप डायनामिक्स, सीखने की प्रक्रिया, सीखने के डोमेन और सीखने के सिद्धांत, लक्ष्य, भूमिकाएं और योग्यताएं आदि की ट्रेनिंग दी गई। सीबीएमई में टीचिंग लर्निंग मेथड्स- टीएलएम, असेसमेंट का परिचय, इंटरनल असेसमेंट और फॉर्मेटिव असेसमेंट, एईटीसीओएम कॉन्सेप्ट और कंडक्ट, कॉन्सेप्ट और कंडक्ट, प्रभावी क्लिनिकल और प्रैक्टिकल स्किल टीचिंग, उद्देश्यों और दक्षताओं के लिए टीएलएम को अलाइन करना, असेसमेंट प्लानिंग, लेसन प्लान लिखना, असेसमेंट प्लानिंग और क्वालिटी एश्योरेंस, सही निबंध प्रश्न, छोटे उत्तर वाले प्रश्न और एमसीक्यू लिखना, दक्षता, उद्देश्यों और सीखने के साथ असेसमेंट का मिलान, क्लिनिकल और प्रैक्टिकल स्किल्स का असेसमेंट, एकेडमिक ग्रोथ और नेटवर्किंग, दक्षता और टीएलएम के साथ असेसमेंट को अलाइन करना, मेंटरिंग, और दक्षताओं के आधार पर एक चरण के लिए शेड्यूल का ड्राफ्ट तैयार करना भी बताया। वर्कशॉप के समापन पर सभी प्रतिभागियों को सर्टिफिकेट्स भी वितरित किए गए।
बीसीएमई रीजनल सेंटर- एसआरएमएसआईएमएस, बरेली के तहत मेडिकल फैकल्टीज़ को नए एमबीबीएस करिकुलम में हुए बदलावों के बारे में जागरूक करना रहा। साथ ही ट्रेनर्स को फैसिलिटेटर के रूप में प्रशिक्षित करना था। वर्कशॉप में एनएमसी ऑब्जर्वर एसआरएमएसआईएमएस, बरेली के एमईयू-कोऑर्डिनेटर और आरसी कन्वीनर डॉ. जसविंदर सिंह की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। वर्कशॉप में टीएमयू मेडिकल एजुकेशन और करिकुलम कमेटी के सदस्यों- प्रिंसिपल डॉ. एनके सिंह, वाइस प्रिंसिपल एवम् फार्माकोलॉजी के एचओडी और एमईयू कोऑर्डिनेटर प्रो. प्रीथपाल सिंह मटरेजा, रेडियोडायग्नोसिस के सीनियर प्रोफेसर प्रो. राजुल रस्तोगी, पैथोलॉजी की एचओडी डॉ. सीमा अवस्थी, डॉ. आशुतोष कुमार, कम्युनिटी मेडिसिन की प्रोफेसर डॉ. साधना सिंह, रेडियोडायग्नोसिस की डॉ. श्रुति चंदक, माइक्रोबायोलॉजी के डॉ. सुधीर सिंह, एनेस्थिसियोलॉजी की डॉ. पायल जैन, पैथोलॉजी के डॉ. अर्नव कुमार रॉय चौधरी, डॉ. प्राची सिंह, डॉ. फैजा सामिन को 2015 से रीजनल सेंटर/नोडल सेंटर द्वारा संशोधित बेसिक कोर्स वर्कशॉप और एईटीसीओएम ट्रेनिंग/बीसीएमई के लिए प्रशिक्षित किया गया है। फेज वन में विभागों से 2 प्रतिभागी; फेज सेकेंड में विभागों से 4 प्रतिभागी और फेज थर्ड में विभागों से 24 प्रतिभागियों का चयन किया गया। वर्कशॉप में नए कॉन्सेप्ट जैसे- इलेक्टिव, अर्ली क्लिनिकल एक्सपोजर और स्किल असेसमेंट पर भी विस्तार से चर्चा की गई।


