जहां एक ओर अपना सब कुछ गवां बैठे धराली के निवासी अपने भविष्य को ले कर परेशान हैं वहीं उन्हें अपने को आपदा पीड़ित घोषित करवाने के लिए कलक्ट्रेट के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं ।
अमन के पिता पहले ही उन्हें छोड़ कर स्वर्गवासी हो गए थे मां सेब के बागीचे व खेती की आय से बच्चों को पढ़ा कर धीरे धीरे परिवार को पटरी पर लाने को कोशिश कर रही थीं बच्चे भी अपनी मां से कंधा मिलाकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे ।
बड़ी बहिन जो कि अस्थाई नौकरी कर अपने परिवार की सहायता कर रही थी और उन्होंने पुस्तैनी मकान के अलावा एक और मकान बना कर सेब की ग्रेडिंग मशीन लगा रखी थी फिर आपदा ने सब कुछ छीन लिया।बहिन की एक साल पहले शादी हो गई है अब उसे दोनों परिवारों को देखने की जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है ।
अमन हिम्मत करके आगे अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहता है बहिन मां और ग्राफिक ऐरा उसका साथ देना चाहते हैं पर उसे अभी तक आपदा प्रभावित का प्रमाणपत्र सरकार की ओर से नहीं मिल पाया ।
कल कलक्ट्रेट में कोई भी जिम्मेदार अधिकारी उसे नहीं मिल पाया जो उसे आपदा प्रभावित होने का प्रमाणपत्र दे सके । अमन का कहना है कि जब सीट पूरी हो जाएगी तो वो उस प्रमाण पत्र का क्या करेगा ।
कल पूरे दिन तक हर्षिल धराली का नेटवर्क तथा मोटरमार्ग बंद रहा ।
इस समय पढ़ने वाले ज़्यादातर बच्चे देहरादून, उत्तरकाशी या अन्य शहरों में पढ़ रहे हैं और उनके विद्यालय उनकी मदद करने को तैयार हैं पर प्रमाण पत्र के अभाव में उनके हाथ बंधे हैं।
कब तक प्रभावित सरकार के चक्कर लगाते रहेंगे।
उत्तरकाशी से दिनेश भट्ट ।