उत्तरकाशी: होटल व्यवसायियों का दिल छू लेने वाला कदम, आपदा पीड़ितों और स्वयंसेवकों के लिए बनी उम्मीद की किरण
उत्तरकाशी, 23 अगस्त 2025: बीते 5 अगस्त को आए भीषण सैलाब ने उत्तरकाशी के धराली गांव और धराली बाजार को तहस-नहस कर दिया। प्राकृतिक आपदा की इस भयावह लहर ने न केवल लोगों के घर उजाड़े, बल्कि उनकी जिंदगी की छोटी-छोटी यादों को भी छीन लिया। एक सुई तक न बचा पाने की पीड़ा और बेघर होने का दर्द झेल रहे पीड़ितों के बीच, उत्तरकाशी के होटल व्यवसायियों ने मानवता की ऐसी मिसाल पेश की है, जो हर दिल को छू रही है।
होटल विश्वनाथ और सहज विला जैसे प्रतिष्ठानों ने अपने दरवाजे आपदा पीड़ितों और उनकी मदद के लिए आए स्वयंसेवकों के लिए खोल दिए। निःशुल्क ठहरने की सुविधा, गर्म भोजन और अन्य जरूरी सेवाएं देकर इन होटल व्यवसायियों ने न केवल पीड़ितों के जख्मों पर मरहम लगाया, बल्कि उनके हौसले को भी नई ताकत दी। उत्तरकाशी लोक हितैषी मंच के अध्यक्ष विजयेश्वर प्रसाद (अनिल) डंगवाल ने इस नेक कार्य के लिए होटल व्यवसायियों के प्रति गहरी कृतज्ञता जताई। उन्होंने रेड क्रॉस के चेयरमैन माधव जोशी और होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष शैलेंद्र मटूडा की विशेष रूप से प्रशंसा करते हुए कहा, “इन होटल व्यवसायियों ने अपने व्यावसायिक हितों को दरकिनार कर जिस तरह मानवता की सेवा की, वह एक अनमोल उदाहरण है। यह दिखाता है कि संकट की घड़ी में इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है।”
यह पहल उन लोगों के लिए एक उम्मीद की किरण बनकर उभरी है, जिन्होंने सब कुछ खो दिया। बेघर हुए परिवारों की आंखों में आशा की चमक और स्वयंसेवकों के चेहरों पर संतुष्टि की मुस्कान इस बात का सबूत है कि मानवता अभी जिंदा है। स्थानीय समुदाय और स्वयंसेवकों ने इस कार्य को दिल से सराहा है। एक स्वयंसेवक ने भावुक होते हुए कहा, “जब सब कुछ खत्म हो चुका था, तब इन लोगों ने हमें नया जीवन दिया। यह सिर्फ सेवा नहीं, बल्कि एक परिवार का प्यार है।”
उत्तरकाशी के इन होटल व्यवसायियों का यह कदम न केवल आपदा पीड़ितों के लिए राहत का सबब बना, बल्कि समाज में एकजुटता, सहानुभूति और भाईचारे की भावना को और गहरा कर गया। यह कहानी हर उस इंसान के लिए प्रेरणा है, जो मानता है कि मुश्किल वक्त में एक छोटा-सा प्रयास भी किसी की जिंदगी में बड़ा बदलाव ला सकता है। आइए, इस नेक कार्य को सलाम करें और इसे एक मिसाल बनाकर दूसरों को भी प्रेरित करें।