उत्तराखंड

जूनियर हाई स्कूल लम्बधार से सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक राजेन्द्र सिंह भण्डारी के निधन पर शोक

सेवानिवृत्त राजकीय पेंशनर्स संगठन मुनिकीरेती-ढालवाला के सक्रिय सदस्य बडहल(शिवपुरी) निवासी,नरेंद्र नगर विकास खण्ड के जूनियर हाई स्कूल लम्बधार से सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक श्री राजेन्द्र सिंह भण्डारी कुछ दिन पूर्व सडक दुर्घटना में गम्भीर रूप से घायल होने के पश्चात अस्पताल मेॅ उनका निधन होने से मुनिकीरेती-ढालवाला ही नहीं बल्कि बडहल,शिवपुरी,तिमली व सम्पूर्ण दोगी पट्टी क्षेत्र में शोक की लहर व्याप्त है। आज उनका अन्तिम संस्कार उनके पैतृक घाट शिवपुरी में सैकडों की उपस्थिति में किया गया। उनके इकलौते पुत्र संजय भण्डारी ने चिता को मुखाग्नि दी।उनके सम्मान व स्मरण के लिए सेवानिवृत्त राजकीय पेंशनर्स संगठन मुनिकीरेती-ढालवाला की एक शोक सभा में दिवंगत आत्मा की शान्ति के लिए दो मिनट का मौन रख कर श्रद्धांजलि अर्पित की गयी। श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए सेवानिवृत्त राजकीय पेंशनर्स संगठन उत्तराखण्ड के प्रदेश अध्यक्ष विरेन्द्र सिंह कृषाली ने कहा कि आकर्षक व्यक्तित्व के धनी राजेन्द्र सिंह भण्डारी शिक्षक समाज के लिए आदर्श हैं उन्होंने राजकीय सेवा शानदार व यादगारी रूप में की है।आकर्षक व्यक्तित्व के धनी भण्डारी का समाज ऋणी रहेगा।बैठक में शोक व्यक्त करते हुए शाखा अध्यक्ष शूरवीरसिंह चौहान ने कहा कि मृत्यु शाश्वत सत्य है,हमें मृत्यु से नहीं डरना है।संसार में रहकर उत्कृट कार्य कर हम इस धरती पर स्वर्ग से बढ़कर सुख- वैभव प्राप्त करते हैं। संसार में रहकर उत्कृष्ट कार्य करें। हमसब स्वर्ग‌वासी है। उनके सबसे गहरे व बचपन के साथी राजेन्द्र भण्डारी ने कहा कि वे साहसी,मृदुभाषी व निडर थे।हमेशाउनका सौहार्द पूर्ण व्यवहार रहा है। वे हम सब के लिये प्रेरणा स्रोत हैं।कोषाध्यक्ष जबर सिंह पंवार ने कहा कि उनका व्यक्तित्व व कार्य शैली, सामाजिक समरसता हमारे ह्रदय में हमेशा बसी रहेगी तथा हमारा मार्ग प्रशस्त करेगी। उनके साथी शिक्षक हृदयराम सेमवाल ने कहा कि उनके द्वारा किये गए कार्य हम सभी को मधुर स्मृति में सदैव याद रखेंगे। इस अवसर पर संगठन के वरिष्ठ सदस्य विजेन्द्रसिंह रावत ने कहा कि उनके निधन से संगठन की अपूरणीय क्षति हुई है जिसकी भरपाई नहीं हो सकती।शोक व्यक्त करने वालों में भगवती प्रसाद उनियाल,पूर्ण सिंह रावत,राजेश चमोली,वीरेंद्रमोहन सजवाण, सौकारसिंह असवाल आदि उपस्थित थे।

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