उत्तराखंड

जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” शिविर में दिव्यांग बालिका को योजनाओं से जोड़ने की पहल

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाने के लक्ष्य के साथ निरंतर कार्य कर रही है। इसी क्रम में जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल के निर्देशों के क्रम में जनपद के विकासखंड भिलंगना के धमातोली में आयोजित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम के दौरान एक दिव्यांग बालिका को योजनाओं से जोड़ने की मानवीय पहल सामने आई।

तहसील घनसाली के बडियारगढ़ मलगांव, निवासी लगभग 10 वर्षीय दिव्यांग बालिका निर्मला दिव्यांग पेंशन की पात्र होने के बावजूद लाभ से वंचित थी, क्योंकि उसके पास आधार कार्ड, बैंक खाता और जन्म प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं था। शिविर के दौरान यह तथ्य सामने आते ही प्रशासन ने इसे प्राथमिकता पर लेते हुए कार्यवाही शुरू की।

जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल नितिका खण्डेलवाल के निर्देशन में समाज कल्याण विभाग ने संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित कर बालिका का जन्म प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया पूरी कराई, आधार कार्ड बनवाने की कार्रवाई शुरू कराई तथा बैंक खाते के लिए एलडीएम से समन्वय किया गया, ताकि घर जाकर खाता खोला जा सके। इससे पूर्व दिव्यांग शिविर में बालिका के पिता, जो स्वयं दिव्यांग हैं, का प्रमाण पत्र नवीनीकरण कर उन्हें वॉकर भी प्रदान किया गया था। दस्तावेज पूर्ण होते ही बालिका को दिव्यांग भरण-पोषण अनुदान पेंशन योजना से जोड़ा जाएगा।

जिला समाज कल्याण अधिकारी श्रेष्ठा भाकुनी ने बताया कि शिविर में जानकारी मिली कि बच्ची का दिव्यांग प्रमाण पत्र तो बना हुआ था, लेकिन आधार कार्ड, बैंक खाता और जन्म प्रमाण पत्र न होने के कारण पेंशन नहीं लग पा रही थी। विभाग ने व्यक्तिगत स्तर पर लगातार फॉलो-अप किया, पत्राचार और दूरभाष के माध्यम से संबंधित स्थान से जन्म प्रमाण पत्र बनवाया गया तथा आधार कार्ड और बैंक खाता खुलवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि सभी दस्तावेज पूर्ण होते ही ऑनलाइन आवेदन कर शीघ्र ही बच्ची को पेंशन से आच्छादित कर दिया जाएगा, जिससे वह नियमित आर्थिक सहायता प्राप्त कर सकेगी।

यह पहल “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम की सफलता का जीवंत उदाहरण है, जिसमें जरूरतमंद व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने हेतु टिहरी गढ़वाल प्रशासन तत्परता से कार्य कर रहा है। ऐसे प्रयास सरकार की जनकल्याणकारी सोच और संवेदनशील शासन व्यवस्था को दर्शाते हैं।

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