देहरादून को स्वच्छता में टॉप-20 में लाने की तैयारी, 2 साल का विस्तृत रोडमैप तैयार

Ramesh Kuriyal
3 Min Read

देहरादून | संवाददाता

स्वच्छ सर्वेक्षण में लगातार सुधार कर रहे देहरादून को अब देश के शीर्ष 20 स्वच्छ शहरों में शामिल करने के उद्देश्य से एक व्यापक और परिणाम-उन्मुख कार्ययोजना तैयार की गई है। इस रोडमैप में कचरा प्रबंधन प्रणाली को मजबूत करने, अवसंरचना विकसित करने, जनभागीदारी बढ़ाने और तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है।

वर्तमान में देहरादून की रैंकिंग करीब 62वें स्थान के आसपास है। हालांकि पिछले वर्षों में सुधार दर्ज किया गया है, लेकिन शहर अभी भी शीर्ष 25 में स्थान बनाने के लिए संघर्ष कर रहा है। इसके पीछे असंगठित कचरा प्रबंधन, सीमित प्रोसेसिंग क्षमता और नागरिकों की कम भागीदारी प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं।

मुख्य लक्ष्य तय

नई योजना के तहत नगर निगम ने कई स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए हैं, जिनमें 100% डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण और 90% से अधिक कचरा प्रोसेसिंग शामिल है। साथ ही, जनभागीदारी आधारित स्वच्छता मॉडल विकसित करने पर भी जोर दिया गया है।

चुनौतियां अभी भी बरकरार

शहर में स्वच्छता व्यवस्था को लेकर कई चुनौतियां सामने हैं। कचरा संग्रहण में असंगतता, प्रोसेसिंग सुविधाओं की कमी, लोगों में कचरा अलग करने की आदत का अभाव और विभागों के बीच तालमेल की कमी प्रमुख समस्याएं हैं। इसके अलावा पर्यटन सीजन में बढ़ने वाला कचरा भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

चार स्तंभों पर आधारित रणनीति

इस योजना को चार प्रमुख स्तंभों पर लागू किया जाएगा:

  • सिस्टम सुदृढ़ीकरण: GPS आधारित कलेक्शन और रूट प्लानिंग
  • अवसंरचना विकास: कंपोस्टिंग यूनिट्स और प्रोसेसिंग प्लांट्स का विस्तार
  • जनभागीदारी: स्कूल, कॉलेज और RWAs के जरिए जागरूकता अभियान
  • तकनीकी निगरानी: रियल-टाइम डैशबोर्ड और मोबाइल ऐप के माध्यम से मॉनिटरिंग

चरणबद्ध तरीके से होगा काम

कार्ययोजना को चरणों में लागू किया जाएगा। पहले 6 महीनों में 100% कचरा संग्रहण और पृथक्करण पर फोकस रहेगा। इसके बाद 6–12 महीनों में प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाने और नई इकाइयों की स्थापना की जाएगी। वहीं, “मेरा स्वच्छ देहरादून” जैसे अभियान के माध्यम से जनभागीदारी को लगातार बढ़ाया जाएगा।

कैसे होगी निगरानी?

नगर निगम द्वारा साफ-सफाई से जुड़े सभी कार्यों की निगरानी के लिए रियल-टाइम डैशबोर्ड तैयार किया जाएगा। साथ ही, नागरिकों की शिकायत और सुझाव के लिए मोबाइल ऐप भी विकसित किया जाएगा। सफाई कर्मचारियों का मूल्यांकन भी प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा।

सफलता के मानक तय

योजना की प्रगति को मापने के लिए कुछ प्रमुख संकेतक तय किए गए हैं, जिनमें कचरा संग्रहण कवरेज, पृथक्करण अनुपालन, प्रोसेसिंग दक्षता और नागरिक संतुष्टि शामिल हैं।

जोखिम और समाधान पर भी फोकस

योजना में संभावित जोखिमों को भी ध्यान में रखा गया है। नागरिकों के व्यवहार में बदलाव लाने के लिए जागरूकता और प्रोत्साहन योजनाएं चलाई जाएंगी। वहीं, वित्तीय चुनौतियों से निपटने के लिए CSR और PPP मॉडल अपनाने की बात कही गई है।

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