देहरादून। राजधानी देहरादून में बस्ती अधिनियम, मजदूरों के अधिकारों और प्रस्तावित एलिवेटेड रोड परियोजना के विरोध में प्रमुख विपक्षी दलों और जन संगठनों ने संयुक्त आंदोलन का ऐलान किया है। “बहुत हो गया गरीबों पर वार, इस बार हमें चाहिए अधिकार” अभियान के तहत आंदोलन के पहले चरण की शुरुआत कर दी गई है।
देहरादून प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, चेतना आंदोलन और सर्वोदय मंडल उत्तराखंड के प्रतिनिधियों ने सरकार पर मजदूरों और बस्तीवासियों की अनदेखी का आरोप लगाया। वक्ताओं ने कहा कि वर्ष 2016 में बने मजदूर बस्ती अधिनियम के बावजूद आज तक सरकार ने बस्तियों के नियमितीकरण और निवासियों को अधिकार देने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
उन्होंने कहा कि सरकार एक ओर लोगों को अवैध बता रही है, वहीं दूसरी ओर अपने ही कानूनों का पालन नहीं कर रही। वक्ताओं ने प्रस्तावित एलिवेटेड रोड परियोजना को विनाशकारी बताते हुए कहा कि इससे शहरवासियों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ेगा और ट्रैफिक जाम की समस्या भी कम नहीं होगी। आरोप लगाया गया कि एनजीटी के नाम पर जनता को भ्रमित कर बस्तियों को हटाने की कोशिश की जा रही है।
प्रेस वार्ता में कांठ बंगला बस्ती के जबरन विस्थापन के प्रयास का भी मुद्दा उठाया गया। वक्ताओं ने कहा कि प्रभावित लोगों की याचिका पर उच्च न्यायालय को इस कार्रवाई पर रोक लगानी पड़ी।
निर्माण मजदूरों की समस्याओं को उठाते हुए संगठनों ने आरोप लगाया कि निर्माण मजदूर बोर्ड पंजीकृत यूनियनों के माध्यम से आवेदन लेने से इनकार कर रहा है। नई शर्तों के कारण वास्तविक मजदूर सरकारी योजनाओं और लाभों से वंचित हो रहे हैं। बढ़ती महंगाई और गैस संकट के बीच मजदूरों की स्थिति लगातार खराब हो रही है।
आंदोलन के तहत शहरभर में जनसभाएं आयोजित की जा रही हैं। इसके बाद 30 मई को बाबा साहेब आंबेडकर की प्रतिमा से जुलूस निकाला जाएगा। संगठनों ने चेतावनी दी कि जब तक बस्तीवासियों और मजदूरों को कानूनी अधिकार नहीं मिलते, आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से और तेज किया जाएगा।
प्रेस वार्ता में पत्रकार हेम भट्ट की गिरफ्तारी की भी कड़ी निंदा की गई। वक्ताओं ने इसे गैरकानूनी कार्रवाई बताते हुए कहा कि इस मुद्दे पर भी आगामी दिनों में आंदोलनात्मक कार्यक्रम किए जाएंगे।
प्रेस वार्ता में उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के पूर्व सदस्य एवं कांग्रेस नेता संजय शर्मा, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता समर भंडारी, सर्वोदय मंडल के अधिवक्ता हरबीर सिंह कुशवाहा और चेतना आंदोलन के शंकर गोपाल मौजूद रहे। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव डॉ. सत्यनारायण सचान और कांग्रेस नेता प्रवीण त्यागी ने भी आंदोलन को समर्थन दिया।



