Ad image

“परिवर्तन जनसंवाद” में उठा उत्तराखंड के संकटों का मुद्दा, जनएकता पर जोर

Ramesh Kuriyal
2 Min Read

देहरादून। उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी की ओर से “उत्तराखंड जनसंवाद यात्रा” के तहत रविवार को जैन धर्मशाला में विचार-विमर्श कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें राज्य की सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों पर चर्चा करते हुए जनपक्षीय संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपने विचार रखे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पार्टी अध्यक्ष पी. सी. तिवारी ने कहा कि राज्य गठन के 25 वर्ष बाद भी उत्तराखंड आंदोलन के मूल उद्देश्य अधूरे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले वर्षों में सत्ता में रही सरकारों ने राज्य की प्राकृतिक संपदाओं को पूंजीपतियों और माफियाओं के हवाले कर दिया, जिससे प्रदेश कई संकटों से जूझ रहा है।

उन्होंने कहा कि बेरोजगारी, महंगाई, महिला हिंसा, भर्ती घोटाले, पलायन और मानवाधिकार हनन जैसे मुद्दों से जनता में निराशा बढ़ी है। वक्ताओं ने कहा कि अलग-अलग दलों की सरकारें बनने के बावजूद राज्य निर्माण की मूल अवधारणा के अनुरूप नीतियां लागू नहीं हो सकीं।

महिला मंच की कमला पंत ने विभिन्न संगठनों और विचारधाराओं से जुड़े लोगों के बीच साझा मंच तैयार करने की आवश्यकता बताई। वहीं वरिष्ठ पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता चारू तिवारी ने जनपक्षीय एकजुटता के प्रयासों का समर्थन किया।

पार्टी के केंद्रीय महासचिव प्रभात ध्यानी ने बताया कि पार्टी का द्विवार्षिक सम्मेलन 1 और 2 जून को रामनगर में आयोजित किया जाएगा। इसमें राज्य के वर्तमान हालात और व्यापक जनएकता के प्रयासों पर चर्चा होगी।

बैठक में बलदेव सूद, आर. पी. विशाल, राजेश वर्मा, नंद नंदन पांडे, कुलदीप मदवाल, जगदीश ममगई, पुष्पा भल्ला, शालू जैन, प्रदीप सती, अजय नौटियाल, विनोद प्रसाद रतूड़ी समेत कई सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

Share This Article
Leave a Comment