देश की आजादी के 80 साल और उत्तराखंड राज्य गठन के 26 साल बीत जाने के बाद भी टिहरी जिले के प्रतापनगर विधानसभा क्षेत्र का एक गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है। ग्राम पंचायत सिलोडा (पट्टी उपली रामोली) के ग्रामीण आज भी आवागमन के लिए सड़क मार्ग की बाट जोह रहे हैं और रोजाना 5 किलोमीटर पैदल यात्रा करने को मजबूर हैं।
राज्य आंदोलनकारी व नशा मुक्त जनमोर्चा के कार्यकर्ता देवी सिंह पंवार ने क्षेत्र की इस उपेक्षा पर गहरा दुख व रोष व्यक्त करते हुए शासन-प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
2005 में स्वीकृत हुआ था मोटर मार्ग, 21 साल बाद भी अधूरा
देवी सिंह पंवार ने बताया कि वर्ष 2005 में उनके विशेष अनुरोध पर प्रतापनगर के तत्कालीन विधायक स्वर्गीय फूल सिंह बिष्ट ने 7 किलोमीटर लंबे ‘खमाखाल-सिलोडा मोटर मार्ग’ को स्वीकृति दिलाई थी। उस समय देवी सिंह पंवार स्वयं जिला पंचायत सदस्य थे।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2002 से लेकर 2026 तक कई सरकारें आईं और गईं, कई विधायक चुने गए, लेकिन सिलोडा गांव के लोगों की सड़क की समस्या का समाधान आज तक नहीं हो पाया। क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और संगठन के बड़े नेता गांव में चुनाव के समय पैदल पहुंचते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद इस मुख्य मार्ग के निर्माण पर कोई ध्यान नहीं देते।
जनता दरबार से लेकर मुख्यमंत्री तक लगाई गुहार
देवी सिंह पंवार का कहना है कि उन्होंने इस मोटर मार्ग के निर्माण के लिए व्यक्तिगत रूप से हर संभव प्रयास किया।
- जनता दरबार में आवाज उठाने से लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपने तक, हर स्तर पर मांग रखी गई।
- अधिकारियों और शासन में बैठे उच्च पदस्थ लोगों ने जनता की इस जायज मांग को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया।
- सड़क का मुद्दा उठाने पर केवल आश्वासन और झूठे वादे ही मिले।
“उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी होने के नाते आज मुझे खुद पर शर्म महसूस होती है कि जिस गांव के विकास के लिए हमने प्रयास किए, वहां के लोगों को आज भी 5 किलोमीटर पैदल नापना पड़ रहा है। जनता से केवल वोट लिए गए, लेकिन उन्हें उनके बुनियादी अधिकार नहीं दिए गए।” — देवी सिंह पंवार, राज्य आंदोलनकारी
सिद्ध पीठ मां नांगणी का दिव्य स्थान, फिर भी उपेक्षित
गौरतलब है कि इसी गांव में प्रसिद्ध सिद्ध पीठ मां नांगणी का दिव्य स्थल स्थित है। पूर्व में तत्कालीन जिलाधिकारी सुंदरलाल मुयाल और टीएचडीसी (THDC) के महाप्रबंधक डीपीएस त्यागी को भी इस क्षेत्र का भ्रमण कराया गया था, जिसके बाद गांव को नांगणी स्थान पर एक खेल मैदान की सौगात मिली थी। हालांकि, मुख्य सड़क मार्ग न बनने से यहां आने-जाने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों और आंदोलनकारियों ने पीडब्ल्यूडी (PWD), सूचना विभाग तथा शासन-प्रशासन से मांग की है कि राजनीतिक बयानबाजी से ऊपर उठकर खमाखाल-सिलोडा 7 किमी मोटर मार्ग का निर्माण कार्य शीघ्र अति शीघ्र पूरा कराया जाए।



