लखनऊ, 17 अगस्त 2026। विश्व फोटोग्राफी दिवस के अवसर पर 19 अगस्त को लखनऊ मेट्रो में अनूठा फोटोग्राफी आयोजन किया जाएगा। इस दौरान चलती मेट्रो ट्रेन के भीतर विशेष फोटो वॉक कार्यशाला आयोजित होगी, जबकि हजरतगंज मेट्रो स्टेशन पर दो दिवसीय फोटोग्राफी प्रदर्शनी लगाई जाएगी। आयोजन में करीब 40 फोटोग्राफर हिस्सा लेंगे।
आयोजन का क्यूरेशन प्रदेश के चित्रकार एवं कला समीक्षक भूपेंद्र कुमार अस्थाना कर रहे हैं। उन्होंने पारंपरिक प्रदर्शनी स्थलों से बाहर निकलकर चलती मेट्रो को ही फोटोग्राफी के लिए एक जीवंत मंच के रूप में प्रस्तुत करने की पहल की है। उनका कहना है कि शहर को देखने के लिए केवल कैमरा ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उसके पीछे संवेदनशील दृष्टि भी जरूरी है।
मेट्रो बनेगी चलती-फिरती फोटोग्राफी प्रयोगशाला
फोटो वॉक के दौरान मेट्रो ट्रेन फोटोग्राफी की चलती-फिरती प्रयोगशाला के रूप में नजर आएगी। युवा फोटोग्राफर कुंवर प्रतिभागियों को मेंटर के रूप में मार्गदर्शन देंगे। वे मेट्रो यात्रा के दौरान कंपोजिशन, फ्रेमिंग, प्रकाश-छाया, निर्णायक क्षण और स्ट्रीट व डॉक्यूमेंट्री फोटोग्राफी से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी देंगे।
इस दौरान यात्रियों की गतिविधियां, मेट्रो की गति, शहर की बदलती तस्वीर, वास्तुकला की ज्यामिति, प्रकाश और छाया तथा खिड़कियों से गुजरते शहरी दृश्य प्रतिभागियों के लिए फोटोग्राफी के विषय होंगे।
मुंशी पुलिया से एयरपोर्ट तक तलाशे फोटोग्राफिक फ्रेम
आयोजन की तैयारियों के तहत मुंशी पुलिया मेट्रो स्टेशन से चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट मेट्रो स्टेशन तक संभावित फोटोग्राफी स्पॉट्स का सर्वे किया गया। सर्वे टीम में क्यूरेटर भूपेंद्र कुमार अस्थाना, कार्यशाला के मेंटर एवं युवा फोटोग्राफर कुंवर तथा लखनऊ मेट्रो की ओर से फोटोग्राफर सौरभ शामिल रहे।
टीम ने विभिन्न स्टेशनों, प्लेटफॉर्म, कॉरिडोर, यात्रियों की गतिविधियों, वास्तुशिल्पीय संरचनाओं, प्रकाश-छाया और मेट्रो की खिड़कियों से दिखाई देने वाले शहरी दृश्यों का फोटोग्राफिक दृष्टि से अवलोकन किया। इस दौरान लखनऊ की रफ्तार, उसके लोग, वास्तुकला और रोजमर्रा के जीवन में छिपे कई संभावित फोटोग्राफिक फ्रेम तलाशे गए।
साधारण दृश्य को असाधारण फ्रेम में बदलने पर जोर
क्यूरेटर भूपेंद्र कुमार अस्थाना के अनुसार, फोटो वॉक का उद्देश्य प्रतिभागियों में ऐसी रचनात्मक दृष्टि विकसित करना है, जिससे वे सामान्य दिखाई देने वाले दृश्यों में भी कहानी और संभावना तलाश सकें।
उन्होंने कहा कि फोटोग्राफी को केवल तकनीकी अभ्यास तक सीमित रखने के बजाय दृश्य संवेदना और रचनात्मक सोच को विकसित करना आयोजन का प्रमुख उद्देश्य है। मेट्रो की खिड़की से गुजरता कोई दृश्य, प्लेटफॉर्म पर इंतजार करता यात्री, वास्तुकला की कोई रेखा या प्रकाश-छाया का अप्रत्याशित संयोजन—संवेदनशील नजर के लिए एक प्रभावशाली तस्वीर बन सकता है।
शहर को देखने की मिलेगी नई दृष्टि
विश्व फोटोग्राफी दिवस पर आयोजित यह पहल लखनऊ की फोटोग्राफी संस्कृति को एक नए सार्वजनिक और समकालीन संदर्भ से जोड़ने का प्रयास है। इस आयोजन में कैमरा सिर्फ तस्वीर खींचने का माध्यम नहीं, बल्कि शहर को पढ़ने, समझने और महसूस करने का जरिया बनेगा।
लखनऊ मेट्रो शहर की तेज होती जीवनशैली और बदलते शहरी चरित्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में मेट्रो को कला और फोटोग्राफी के मंच के रूप में इस्तेमाल करने की यह पहल शहर को देखने का नया नजरिया प्रस्तुत करेगी।
आयोजकों के अनुसार, कला के लिए पारंपरिक गैलरी की सीमाएं जरूरी नहीं हैं। जहां जीवन है, वहीं कला है और जहां संवेदनशील नजर है, वहीं फोटोग्राफी के लिए एक नया फ्रेम मौजूद है। 19 अगस्त का यह आयोजन लखनऊ की धड़कन, उसकी रफ्तार और रोजमर्रा की जिंदगी में छिपे अनदेखे क्षणों को कैमरे में दर्ज करने की रचनात्मक यात्रा होगा।



