देहरादून। उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की फाइनेंशियल फ्रॉड यूनिट ने अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपित नौकरी और आसान लोन दिलाने का झांसा देकर लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे और उन्हीं खातों का इस्तेमाल ओएलएक्स फ्रॉड समेत विभिन्न साइबर अपराधों में करते थे।
एसटीएफ के अनुसार, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर प्राप्त शिकायतों के विश्लेषण, तकनीकी सर्विलांस और डिजिटल इंटेलिजेंस के आधार पर इंडसइंड बैंक के एक संदिग्ध खाते की जांच की गई। जांच में सामने आया कि इस खाते का इस्तेमाल कई साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में किया जा रहा था।
तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर एसटीएफ ने आशारोड़ी चेकपोस्ट पर राजस्थान नंबर की एक स्कॉर्पियो को रोककर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। उनकी पहचान राहुल मोहम्मद निवासी डींग, राजस्थान और शिवांश उपाध्याय निवासी गोरखपुर (हाल निवासी लखनऊ) के रूप में हुई है।
आरोपियों के कब्जे से चार मोबाइल फोन, पांच इंडसइंड बैंक किट (एटीएम कार्ड और चेकबुक सहित), एक आधार कार्ड तथा 15 हजार रुपये नकद बरामद किए गए हैं।
पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे फेसबुक और इंस्टाग्राम पर निजी कंपनियों में नौकरी तथा आसान लोन दिलाने के नाम पर विज्ञापन चलाते थे। इच्छुक लोगों से व्हाट्सएप के माध्यम से संपर्क कर उनके नाम से ऑनलाइन बैंक खाते खुलवाते थे, लेकिन इन खातों का पूरा नियंत्रण अपने पास रखते थे। बाद में इन्हीं खातों का उपयोग ओएलएक्स पर फर्जी खरीद-बिक्री और अन्य साइबर अपराधों से प्राप्त धनराशि के ट्रांसफर और निकासी के लिए किया जाता था।
एसटीएफ ने दोनों आरोपियों के खिलाफ साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, देहरादून में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह का एक अन्य सदस्य ओएलएक्स के माध्यम से लोगों को ठगी का शिकार बनाता था। एसटीएफ अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है। साथ ही बरामद मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच कर साइबर नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।



