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शिव आराधना मनुष्य को अहंकार से मुक्त कर सत्य और कल्याण के मार्ग पर ले जाती है

Ramesh Kuriyal
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देहरादून। सरस्वती विहार, अजबपुर खुर्द स्थित सरस्वती विहार विकास समिति के मंदिर प्रकोष्ठ की ओर से आयोजित 11 दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा का रविवार को श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के बीच समापन हुआ। कथा के अंतिम दिन व्यासपीठ से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए आचार्य महामाया प्रसाद शास्त्री ने कहा कि भगवान शिव केवल संहार के देवता नहीं, बल्कि करुणा, त्याग, तपस्या और लोकमंगल के प्रतीक हैं।

उन्होंने कहा कि शिव महापुराण मनुष्य को अहंकार, ईर्ष्या, द्वेष और मोह का त्याग कर सत्य, सेवा और परोपकार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। जिस हृदय में शिवत्व जागृत हो जाता है, वहां नकारात्मकता स्वतः समाप्त होने लगती है।

आचार्य शास्त्री ने कहा कि भगवान शिव ने स्वयं विषपान कर संसार को अमृत प्रदान किया। उनका जीवन हमें दूसरों के दुख को बांटने और समाज के कल्याण के लिए समर्पित रहने की प्रेरणा देता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से कथा में सुने गए सद्विचारों को केवल कथा स्थल तक सीमित न रखने, बल्कि उन्हें अपने आचरण और पारिवारिक एवं सामाजिक जीवन में उतारने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा, “शिव की सच्ची आराधना तभी है, जब हमारे भीतर दया, प्रेम, क्षमा, सेवा और परोपकार का भाव जागृत हो।”

11 दिनों तक चली कथा में सरस्वती विहार और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण किया। कथा के दौरान भगवान शिव की महिमा, शिव-पार्वती प्रसंग और शिव महापुराण में वर्णित विभिन्न प्रेरक आख्यानों के माध्यम से सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक जीवन मूल्यों का संदेश दिया गया।

समापन अवसर पर श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ से परिवार, समाज और राष्ट्र की सुख-समृद्धि एवं शांति की कामना की। इस अवसर पर सरस्वती विहार विकास समिति के अध्यक्ष पंचम सिंह बिष्ट, सचिव गजेंद्र भंडारी सहित समिति के पदाधिकारी, मंदिर प्रकोष्ठ के सदस्य, स्थानीय नागरिक और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

समिति पदाधिकारियों ने आचार्य महामाया प्रसाद शास्त्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजन समाज में संस्कार, सद्भाव और आपसी एकता को मजबूत करते हैं।

कथा के समापन के उपलक्ष्य में विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों ने भगवान शिव का प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन को सफल बनाने में मंदिर प्रकोष्ठ, स्थानीय निवासियों, मातृशक्ति, युवाओं और स्वयंसेवकों ने सहयोग किया।

अंत में सामूहिक आरती और भगवान भोलेनाथ के जयघोष के साथ 11 दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान का भावपूर्ण समापन हुआ। पूरे आयोजन के दौरान सरस्वती विहार क्षेत्र शिवभक्ति और आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर रहा।

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