ऋषिकेश। एम्स ऋषिकेश के सामुदायिक चिकित्सा विभाग की ओर से विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया गया। सप्ताहभर चले जागरूकता अभियान के दौरान विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर शिशु के स्वास्थ्य और विकास में मां के दूध के महत्व के बारे में जानकारी दी गई।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि एम्स की कार्यकारी निदेशक प्रो. (डॉ.) मीनू सिंह ने कहा कि स्तनपान शिशु सुरक्षा का पहला और सबसे महत्वपूर्ण आधार है। जन्म के बाद मिलने वाला मां का पहला गाढ़ा दूध (कोलोस्ट्रम) शिशु के लिए प्राकृतिक टीके की तरह काम करता है। उन्होंने कहा कि शिशु और बाल मृत्यु दर को कम करने में स्तनपान की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि स्तनपान को लेकर केवल माताओं को ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार को जागरूक करने की जरूरत है। खासतौर पर कामकाजी माताओं को स्तनपान जारी रखने के लिए परिवार और कार्यस्थल से सहयोग मिलना जरूरी है।
डीन (एकेडमिक्स) प्रो. (डॉ.) सौरभ वार्ष्णेय ने कहा कि स्तनपान के लाभों की जानकारी समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में मेडिकल विद्यार्थियों और युवा चिकित्सकों की भूमिका अहम है। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा में स्तनपान से जुड़े विषयों पर शोध और व्यावहारिक प्रशिक्षण को बढ़ावा देने की जरूरत बताई।
सामुदायिक चिकित्सा विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) वर्तिका सक्सेना ने कहा कि जन्म के पहले घंटे में स्तनपान और शुरुआती छह महीने तक केवल मां का दूध शिशु के स्वस्थ जीवन की मजबूत नींव रखता है। इसे सफल बनाने के लिए परिवार, स्वास्थ्य तंत्र और कार्यस्थल का सहयोग जरूरी है।
उन्होंने बताया कि अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव की दर 80 प्रतिशत से अधिक होने के बावजूद जागरूकता की कमी के कारण करीब 40 प्रतिशत माताएं ही जन्म के पहले घंटे में शिशु को स्तनपान करा पाती हैं। इस अंतर को कम करने के लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है।
नुक्कड़ नाटक से दिया जागरूकता का संदेश
विश्व स्तनपान सप्ताह का समापन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रायवाला में हुआ। यहां इंटर्न चिकित्सकों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से स्तनपान से जुड़ी सामाजिक भ्रांतियों और गलत धारणाओं को दूर करने का संदेश दिया। इसके अलावा ‘स्तनपान कराने वाली पत्नी के सहयोग में पति की भूमिका’ विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में क्षेत्र की 18 से अधिक आशा कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। उत्कृष्ट कार्य करने वाली आशा कार्यकर्ताओं को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान डॉ. स्मिता सिन्हा, डॉ. गार्गी पांडेय, डॉ. एकता पाठक, डॉ. नीलांजन सहित विभाग के चिकित्सक और मेडिकल छात्र मौजूद रहे।



