देहरादून। सामाजिक कार्यकर्ता एवं पैरा लीगल वॉलंटियर सरिता कुड़ियाल के प्रयासों से आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हुई मन्नत राणा को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का रास्ता मिल गया है। सरिता के प्रयासों और स्थानीय लोगों के सहयोग से मन्नत का कक्षा नौ में राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, कारगी चौक में प्रवेश कराया गया। इस पहल से मन्नत के आगे की पढ़ाई जारी रखने और अपने सपनों को साकार करने की उम्मीद जगी है।
मन्नत राणा ने एक निजी विद्यालय से कक्षा आठ तक की पढ़ाई की थी। इसके बाद परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह आगे की पढ़ाई जारी नहीं रख सकी। परिवार के पास विद्यालय की फीस जमा करने के लिए पर्याप्त धनराशि नहीं थी, जिसके चलते उसकी शिक्षा बीच में ही छूट गई।
इस मामले की जानकारी सामाजिक कार्यकर्ता एवं पैरा लीगल वॉलंटियर सरिता कुड़ियाल को मिली तो उन्होंने मन्नत को दोबारा शिक्षा से जोड़ने की पहल की। कक्षा नौ में प्रवेश के लिए जब वह राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, कारगी चौक पहुंचीं तो विद्यालय की ओर से पूर्व विद्यालय का स्थानांतरण प्रमाणपत्र (टीसी) प्रस्तुत करने को कहा गया।
इसके बाद जब सरिता कुड़ियाल मन्नत के पूर्व विद्यालय पहुंचीं तो पता चला कि फीस के रूप में चार हजार रुपये से अधिक की धनराशि बकाया है। फीस जमा नहीं होने के कारण विद्यालय प्रबंधन ने टीसी देने में असमर्थता जताई। सरिता ने विद्यालय प्रशासन से काफी बातचीत की, लेकिन बकाया फीस जमा करने की शर्त सामने बनी रही।
ऐसे में सरिता कुड़ियाल ने प्रेमनगर की सीनियर सिटिजन सोसायटी के पदाधिकारियों और अन्य लोगों से संपर्क कर सहयोग मांगा। उनके प्रयासों से तीन हजार रुपये की धनराशि एकत्रित हो गई, लेकिन इसके बाद भी 1,250 रुपये की राशि कम पड़ रही थी।
मन्नत की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए सरिता कुड़ियाल ने एक बार फिर विद्यालय प्रबंधन से संपर्क किया और शेष 1,250 रुपये की फीस माफ करने का अनुरोध किया। उनके लगातार प्रयासों के बाद विद्यालय प्रशासन ने तीन हजार रुपये जमा होने पर शेष राशि माफ कर दी। इसके बाद मन्नत के लिए टीसी प्राप्त करने और नए विद्यालय में प्रवेश का रास्ता साफ हो गया।
मन्नत का प्रवेश राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, कारगी चौक में कक्षा नौ में कराया गया। विद्यालय की प्रधानाचार्य श्रीमती रामेश्वरी बड़वाल ने बालिका को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बालिका को शिक्षा का अवसर मिलना चाहिए, ताकि वह अपने भविष्य को बेहतर बना सके। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस पहल से मन्नत की पढ़ाई आगे जारी रहेगी और उसका भविष्य उज्ज्वल होगा।
उल्लेखनीय है कि सरिता कुड़ियाल भारत सरकार की एक परियोजना के अंतर्गत जिला स्तर पर कार्य कर रही हैं। वह महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों और बालिकाओं को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने सहित सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं। मन्नत की शिक्षा जारी रखने के लिए किया गया उनका यह प्रयास सामाजिक सहयोग और संवेदनशील पहल की मिसाल है।



