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मालदेवता में सास-बहू की जोड़ी ने राखी कारोबार से बनाई पहचान

Ramesh Kuriyal
6 Min Read

देहरादून। रक्षाबंधन पर्व नजदीक आते ही स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं की बनाई हस्तनिर्मित राखियों की मांग बढ़ने लगी है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़ी रायपुर, सहसपुर और डोईवाला विकासखंड की महिलाएं राखी निर्माण को स्वरोजगार का जरिया बनाकर अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं।

रायपुर विकासखंड के मालदेवता क्षेत्र में सास-बहू लीला रावत और अलका रावत की जोड़ी ने राखी कारोबार में अलग पहचान बनाई है। नई दिशा महिला क्लस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ) के अंतर्गत आशा किरण स्वयं सहायता समूह से जुड़ी दोनों महिलाएं आकर्षक डिजाइन की राखियां तैयार कर रही हैं। इस वर्ष उन्होंने दो हजार से अधिक राखियां तैयार करने का लक्ष्य रखा है। अब तक करीब 1500 राखियां तैयार हो चुकी हैं।

पिछले साल 1200 राखियों से कमाया 25 हजार का मुनाफा

लीला और अलका ने बताया कि पिछले वर्ष प्रशासन के सहयोग से उन्हें बाजार उपलब्ध हुआ। दोनों ने करीब 1200 राखियां तैयार कर सीधे बाजार में बेचीं, जिससे लगभग 25 हजार रुपये का मुनाफा हुआ। इससे उत्साहित होकर उन्होंने इस वर्ष कारोबार को और बढ़ाने का निर्णय लिया।

नौकरी छोड़ सास के साथ शुरू किया स्वरोजगार

अलका रावत ने पिछले वर्ष निजी नौकरी छोड़कर अपनी सास लीला के साथ स्वरोजगार शुरू किया। दोनों ने मालदेवता क्षेत्र में ‘विनी वंडर्स क्रिएशन’ नाम से दुकान शुरू की है। यहां राखियों के अलावा अन्य हस्तनिर्मित और स्थानीय उत्पाद भी तैयार कर बेचे जा रहे हैं।

अलका के मुताबिक स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आय का बेहतर अवसर मिला। सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर वह आर्थिक रूप से मजबूत बनने के साथ कारोबार को भी आगे बढ़ा रही हैं।

इंस्टाग्राम से भी मिल रहे ऑर्डर

हस्तनिर्मित राखियों की बिक्री अब स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं है। ‘विनी वंडर्स क्रिएशन’ के इंस्टाग्राम प्लेटफॉर्म के जरिए भी महिलाओं को राखियों के ऑर्डर मिल रहे हैं। ऑनलाइन मिले ऑर्डर तैयार कर ग्राहकों तक पहुंचाए जा रहे हैं। इससे कारोबार को डिजिटल बाजार में भी विस्तार मिल रहा है।

ऊन से लेकर क्रोशिया तक से तैयार कर रहीं राखियां

महिलाएं ऊन, क्रोशिया, मौली के धागे और रिबन समेत विभिन्न सामग्रियों से राखियां तैयार कर रही हैं। इनमें भैया दूज, महाकाल, रुद्राक्ष और नजरबट्टू समेत पारंपरिक व आधुनिक डिजाइन शामिल हैं। राखियों की डिजाइनिंग, प्रिंटिंग, पैकेजिंग और प्रचार-प्रसार का काम भी महिलाएं स्वयं कर रही हैं।

2016 से एनआरएलएम से जुड़ी हैं लीला

आशा किरण स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष लीला रावत वर्ष 2016 से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी हैं। उन्होंने बताया कि इस दौरान विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ मिला, जिससे स्वरोजगार को आगे बढ़ाने में मदद मिली। समूह से जुड़ी महिलाएं योजनाओं का लाभ लेकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ कारोबार का विस्तार कर रही हैं।

सहसपुर और डोईवाला में भी तैयार हो रही राखियां

रायपुर के अलावा सहसपुर और डोईवाला विकासखंड की स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं भी बड़े स्तर पर राखियां तैयार कर रही हैं। डोईवाला के गायत्री क्लस्टर लेवल फेडरेशन के अंतर्गत वैभव लक्ष्मी और पहाड़ी भुली ग्राम संगठनों से जुड़ी करीब 100 महिलाएं विभिन्न डिजाइन की राखियां बना रही हैं। इनकी बिक्री रायवाला और श्यामपुर के बाजारों में स्टॉल लगाकर की जा रही है।

वहीं, सहसपुर विकासखंड के सक्षम क्लस्टर की महिलाएं भी राखियां तैयार कर रही हैं। उनकी राखियों को ब्लॉक स्तर पर प्रदर्शित किया जा रहा है और सेलाकुई, सहसपुर तथा विकासनगर क्षेत्र में भी बाजार मिल रहा है।

दून के मॉल में लगेंगे स्टॉल

मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने बताया कि रक्षाबंधन के अवसर पर स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि देहरादून के तीन-चार प्रमुख मॉल में राखियों के स्टॉल लगाए जाएंगे।

उन्होंने लोगों से स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार हस्तनिर्मित राखियों और अन्य स्थानीय उत्पादों की खरीदारी कर उनके स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने की अपील की।

24 से 27 अगस्त तक सचिवालय में पांच स्टॉल

सहायक परियोजना निदेशक अनीता पंवार ने बताया कि 24 से 27 अगस्त तक मुख्यमंत्री सशक्त बहना योजना के तहत उत्तराखंड सचिवालय में पांच स्टॉल लगाए जाएंगे। इनमें सहसपुर, रायपुर और डोईवाला विकासखंड की स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं राखियों के साथ पहाड़ी और अन्य स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री करेंगी।

राखी निर्माण के जरिए ग्रामीण महिलाएं अपने हुनर को कारोबार में बदल रही हैं। मालदेवता की लीला और अलका की सास-बहू की जोड़ी समेत जिलेभर की समूह महिलाएं स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं।

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