
देहरादून। विकास कार्यों के दौरान कुछ असुविधाएं होना स्वाभाविक है, लेकिन भंडारी बाग में निर्माणाधीन रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी) के कार्य ने स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वर्ष 2021 से चल रहे इस प्रोजेक्ट में अव्यवस्थित निर्माण और नियमों की अनदेखी के कारण क्षेत्र के नागरिकों को रोजाना खतरे के बीच आवाजाही करनी पड़ रही है।
भंडारी बाग की ओर आरओबी का ढांचा करीब डेढ़ साल पहले तैयार हो चुका था, लेकिन रेसकोर्स और रेस्ट कैंप की ओर अब तक केवल पिलर ही खड़े थे। हाल के दिनों में दूसरी तरफ एप्रोच रोड का निर्माण शुरू हुआ है और नाले का काम भी चल रहा है। हालांकि, निर्माण के दौरान की गई बेतरतीब खोदाई से सड़क ऊबड़-खाबड़ हो गई है और घरों से बाहर निकलना तक जोखिम भरा हो गया है।
स्थिति यह है कि घरों के प्रवेश मार्ग और सड़क के बीच बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। नाले की खुदाई वाले हिस्से में लोहे के सरिये खुले पड़े हैं, जिससे हादसे का खतरा बना हुआ है। कई स्थानों पर नागरिकों को घर से सड़क तक आने के लिए लोहे की पतली जाली या पाइप रखकर अस्थायी रास्ता बनाया गया है। जरा सी चूक किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। कुछ मकानों के सामने तो अस्थायी रैंप भी नहीं बनाए गए हैं।
निर्माण कार्य के कारण मार्ग अवरुद्ध होने से करीब आधा दर्जन दुकानों पर भी असर पड़ा है। रास्ता बंद होने से ये दुकानें लगभग एक महीने से बंद पड़ी हैं, जिससे व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
रेलवे लाइन के ऊपर बन रहा लोहे का पुल
लोक निर्माण विभाग ने अगस्त 2025 में लीशा कंपनी के साथ नया अनुबंध कर कार्य की गति बढ़ाने के लिए चरणबद्ध लक्ष्य तय किए थे। कंपनी को तीन माह में 25 प्रतिशत, छह माह में 50 प्रतिशत, नौ माह में 75 प्रतिशत और 12 माह में पूरा कार्य पूरा करने का लक्ष्य दिया गया था। हालांकि रेलवे लाइन के ऊपर लोहे का पुल खड़ा किए जाने के इंतजार में शुरुआती तीन माह की प्रगति अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाई।
2013 में देखा सपना, 2021 में हुआ शिलान्यास
भंडारी बाग रेलवे ओवर ब्रिज की योजना वर्ष 2013 में तैयार की गई थी, लेकिन इसका शिलान्यास 2021 में हो सका। शुरुआत से ही परियोजना में देरी होती रही। निर्माण कार्य करीब आठ माह की देरी से शुरू हुआ और परियोजना की दो समयसीमाएं—मार्च 2023 और मार्च 2024—पहले ही बीत चुकी हैं। फिलहाल भंडारी बाग की ओर पुल का ढांचा तैयार है, जबकि रेसकोर्स की ओर अब तक केवल पिलर ही खड़े हैं। हालांकि अब निर्माण कार्य ने कुछ रफ्तार पकड़ी है।
समन्वय की कमी से बढ़ी देरी
परियोजना में बजट या संसाधनों की कमी नहीं थी, लेकिन एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी के कारण काम प्रभावित हुआ। निर्माण का जिम्मा भारत सरकार की कंपनी इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स इंडिया लिमिटेड (ईपीआईएल) को दिया गया था। आरोप है कि कंपनी ने अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर काम में तेजी लाने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए। रेलवे लाइन के ऊपर पुल जोड़ने का काम रेलवे को करना है, जिसके लिए अनुमति और डिजाइन पास कराने में करीब दो वर्ष लग गए।
परियोजना एक नजर में
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लंबाई: करीब 578 मीटर
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कुल लागत: 43 करोड़ रुपये (यूटिलिटी शिफ्टिंग सहित)
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मूल लागत: 33.62 करोड़ रुपये
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यूटिलिटी शिफ्टिंग: 10 करोड़ रुपये
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अब तक खर्च: 17 करोड़ रुपये
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शेष राशि: 16 करोड़ रुपये
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बढ़ी लागत: 12.5 करोड़ रुपये
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कार्य प्रगति: करीब 65 प्रतिशत
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लक्ष्य: अगस्त 2026
क्यों अहम है यह परियोजना
भंडारी बाग से रेसकोर्स चौक तक बनने वाला यह आरओबी सहारनपुर रोड से प्रिंस चौक और हरिद्वार रोड के बीच आवागमन के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराएगा। इसके बनने से आढ़त बाजार के जाम से राहत मिलेगी और सहारनपुर रोड व गांधी रोड पर वाहनों का दबाव भी कम होगा। वहीं कारगी चौक और देहराखास क्षेत्र से प्रिंस चौक की ओर जाने वाले वाहन चालकों को भी बेहतर विकल्प मिलेगा।





