रूम टू रीड के रीडिंग कैंपेन का समापन समारोह

Ramesh Kuriyal
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बच्चों में पठनीयता की आदत विकसित करने के प्रयोजन से शुरू किए गए “रूम टू रीड” के वार्षिक कार्यक्रम ‘रीडिंग कैंपेन’ के छठवें संस्करण का आज दून लाइब्रेरी एवं रिसर्च सेंटर में एक वृहद कहानी वाचन कार्यशाला के साथ समापन हो गया।

प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी 15 अगस्त से आरंभ हुए इस अभियान में शिक्षा विभाग, महिला सशक्तिकरण तथा बाल विकास विभाग, आंगनवाड़ी केंद्रों तथा सामुदायिक संस्थाओं के साथ मिलकर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस वर्ष इस अभियान का सूत्र वाक्य है – मेक रूम फॉर अर्ली लर्निंग। इस धारणा के तहत शुरुआती दौर में ही बच्चों में रचनात्मक चेतना के विकास के उपाय शुरू कर देने चाहिए।

इस प्रयोजन से चित्रकथाओं और ऑडियो-विजुअल माध्यम से उनको कहानियां और कविताएं सुनाई जानी चाहिए। रूम टू रीड की पुष्पलता रावत ने कहा कि 6 वर्ष की आयु तक बच्चों का मस्तिष्क लगभग विकसित हो चुका होता है और यही उम्र है जब उनको मनोरंजक तरीकों से शब्दों की दुनिया से परिचित कराया जाना चाहिए। उनके मुताबिक उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में कथा-वाचन की लंबी परंपरा रही है। संयुक्त परिवारों के टूटने और पलायन से दादी-नानी की कहानियां तेज़ी से खोती जा रही हैं। रूम टू रीड उत्तराखंड के सभी जिलों में वहां प्रचलित लोककथाओं के माध्यम से बच्चों से संवाद जोड़ रहा है। रीडिंग कैंपेन के दौरान विभिन्न स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में इस पहल के सुखद परिणाम सामने आए।

कार्यक्रम में स्टोरीटेलर अनुभा ने बच्चों को शानदार कहानियां सुनाई। कार्यशाला में बच्चों ने भी अपनी कहानियां बुनी और चित्रकला सत्र में बढ़-चढ़कर भाग लिया। सत्र समन्वयक अरविंद बिष्ट ने बताया कि इस कार्यशाला और रीडिंग कैंपेन के दौरान आयोजित अन्य कार्यक्रमों के अनुभवों से यह पता चलता है कि नवोदित पीढ़ी में सीखने की अपार संभावनाएं हैं लेकिन उनको संसाधन और परिवेश उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इसके लिए शैक्षिक संस्थाओं, सरकारी और सामुदायिक पुस्तकालयों, आंगनवाड़ी केंद्रों और सामाजिक संस्थाओं को साथ मिलकर काम करने की ज़रूरत है।

रीडिंग कैंपेन का हिस्सा रहे प्रशांत बर्तवाल ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि 3 सितंबर को आयोजित उनका कार्यक्रम रीड-ए-थान पठनीयता के संकट के इस दौर में नई उम्मीद बंधाने वाला रहा। इस दौरान आधे घंटे तक हजारों बच्चों ने एक साथ अपने पसंद की किताब पढ़ी। इस कार्यक्रम का संचालन मेघा ने किया। इस अवसर पर कथाकार मुकेश नौटियाल, धीरेंद्र मिश्रा, कृतिका के साथ शिक्षक, लेखक और अभिभावक उपस्थित रहे।

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